राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना इंडस के तहत जिले में संचालित 29 विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन को निरस्त करने के लिए कलेक्टर डॉ. जे विजय कुमार ने आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर नई प्रक्रिया अपनाई जाए और नए सिर से स्कूलों के संचालन की जवाबदारी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पूरी की जाए।
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सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर डॉ. कुमार ने ये निर्देश दिए हैं। उन्होंने जांच अधिकारी डीपीसी राजेंद्र पटैल से कहा है कि एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। गौरतलब हो कि नईदुनिया ने इंडस के एक मामले को प्रकाशित कर कलेक्टर डॉ. कुमार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था, जिसके बाद कलेक्टर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच टीम बनाकर जांच के निर्देश दिए थे, साथ ही इस मामले की बेहतर समीक्षा के लिए उसे टीएल में भी शामिल कर दिया था। पिछले दो सप्ताह से इस मामले की समीक्षा की जा रही थी और कलेक्टर ने शीघ्र जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए थे। अब कलेक्टर ने इन सभी स्कलों के संचालन को ही निरस्त करने का आदेश दिया है।
गौरतलब हो कि जिले में संचालित इंडस के 29 स्कूलों का संचालन 11 एनजीओ द्वारा सालों से किया जा रहा है, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं थीं। प्रत्येक स्कूल के लिए दो शिक्षक जिन्हें 7-7 हजार वेतन, एक लिपिक जिसे 5 हजार वेतन, एक सहायक जिसे साढ़े तीन हजार और स्कूल भवन किराया दो हजार रुपए प्रतिमाह शासन की ओर से दिया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान इंडस के कई स्कूलों का संचालन धरातल से गायब मिला था और कई जगह खबर प्रकाशित होने के बाद दिखावा किया जा रहा था।
जांच अधिकारी डीपीसी राजेंद्र पटैल ने भी इस बात को स्वीकार किया था, कि जांच के लिए जब पहुंचे तो उन्हें उस गांव में इंडस के विशेष प्रशिक्षण केंद्र का कोई प्रमाण नहीं मिला, जिसका उन्होंने पंचनामा बनाया है। इसके अलावा इंडस में जिन बच्चों के नाम दर्ज किए गए हैं वे बच्चे वहां के सरकारी स्कूलों में भी दर्ज हैं। इन विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में से कई में न तो बच्चे मिले, न शिक्षक, न लिपिक।
इन सभी खामियों का प्रकाशन करने के बाद कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एक अनुमान के मुताबिक इन सभी एनजीओ द्वारा एक साल में करीब 90 लाख रुपए सरकार से लिया गया है, जबकि इन प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन संभवतः 2009 से चल रहा है।
हो सकती है एनजीओ से रिकवरी -
इंडस के विशेष प्रशिक्षण केंद्रों की गड़बड़ी जांच टीम के सामने भी आ चुकी है। डीपीसी राजेंद्र पटैल ने पहले पटेरा और अब पथरिया ब्लॉक में संचालित बताए गए इंडस के विशेष प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया था। श्री पटैल ने बताया कि रिकार्ड के अनुसार पथरिया ब्लॉक के सतौआ गांव में स्वामी विवेकानंद सा. उत्थान शि.नि. पथरिया एनजीओ के द्वारा इंडस का विशेष प्रशिक्षण केंद्र संचालित होना बताया गया है।
जब वे उस गांव में जांच के लिए पहुंचे तो वहां उन्हें स्कूल नहीं मिला। लोगों ने बताया कि काफी समय पहले कभी-कभार यहां किसी घर में एक-दो बच्चों को बैठा दिया जाता था, लेकिन कई माह से कुछ नहीं है। श्री पटैल ने बताया कि उन्होंने पंचनामा तैयार कर रिपोर्ट में शामिल किया है। अब जब इन प्रशिक्षण केंद्र से जुड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है तो संभव है कि इन संबंधित एनजीओ से उस लाखों रुपए की राशि की रिकवरी भी की जा सकती है। जो इन एनजीओ ने इतने सालों में सरकार से प्राप्त की है।
इसके लिए इंडस कार्यालय में मौजूद पिछले सालों के दस्तावेजों की जांच से पूरा मामला सामने आ जाएगा। इंडस के स्कूलों में दर्ज बच्चे सरकारी स्कूलों में भी दर्ज हैं और एक ही समय में ये बच्चे दोनों जगह उपस्थित नहीं रह सकते। यदि एनजीओ से रिकवरी की जाती है तो निश्चित ही उनके रजिस्ट्रेशन भी रद्द किए जाएंगे।
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