Owner/Director : Anita Khare
Contact No. : 9009991052
Sampadak : Shashank Khare
Contact No. : 7987354738
Raipur C.G. 492007
City Office : In Front of Raj Talkies, Block B1, 2nd Floor, Bombey Market GE Road, Raipur C.G. 492001
——
मंगलवार को CBSE के 10वीं बोर्ड के नतीजे आए। इनमें 1,31,493 स्टूडेंट्स को 90% से ज्यादा तो 27,476 स्टूडेंट्स को 95% से ज्यादा मार्क्स आए हैं। वहीं, रिजल्ट के तुरंत बाद उम्मीद से कम नंबर आने पर तीन बच्चों ने सुसाइड कर लिया। आखिर सीबीएसई की एग्जाम में स्टूडेंट्स को इतने नंबर क्यों मिल रहे हैं? और नंबरों की इस अंधी दौड़ ने क्या बच्चों और पैरेंट्स पर एक्स्ट्रा प्रेशर नहीं डाल दिया? नंबरों की इस मार-काट वाली प्रतिस्पर्धा ने हमारे पूरे एजुकेशन सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए है।
2.बढ़ेगा फ्रस्टेशन : एनसीईआरटी के पूर्व डायरेक्टर और शिक्षाविद्जेएस राजपूत एक उदाहरण देते हुए कहते हैं कि रिजल्ट डिक्लेयर होते ही एक बच्चा उनके पास आया। उसके 95 फीसदी मार्क्स थे। वह बहुत खुश था। लेकिन जब वह स्कूल गया तो वहां स्कूल मैनेजमेंट ने एक लिस्ट लगा रखी थी जिसमें उसका 47वां नंबर था। वह यह देखकर वह फ्रस्टेट हो गया। वे कहते हैं कि कम नंबर्स लाने वाले बच्चे तो फ्रस्टेट होंगे ही, जिन बच्चों के अधिक नंबर आए हैं, उन्हें भी भविष्य में दिक्कत हो सकती है। अब उनसे हमेशा बेहतर परफॉर्म करने की उम्मीद रहेगी। अगर वे फ्यूचर में अच्छा परफॉर्म नहीं करते हैं तो उनमें और ज्यादा फ्रस्टेशन आएगा। मनोवैज्ञानिक रूप से ऐसे बच्चे ज्यादा परेशान होंगे।
3.इमेजिनेशन के लिए जगह ही नहीं होगी: शिक्षा पर काम करने वाले बड़े एनजीओ में से एक एकलव्य के एक्स डायरेक्टर सुब्बू सी.एन. कहते हैं कि सीबीएसई की वैल्यूएशन की मौजूदा पूरी पद्धति ही ऑब्जेक्टिव टाइप है। सीबीएसई के इस सिस्टम में इमेजिनेशन और सोच-विचार के लिए जगह ही नहीं बचेगी। बिल्कुल टाइप्ड टैलेंट निकलकर आएगा जिसके पास इनोवेशन करने के लिए कुछ नहीं होगा।
1.अशोक गांगुलीकहते हैं कि नंबर्स की इस स्फीति (Marks Inflation) को कंट्रोल करना चाहिए, क्योंकि यह फ्यूचर के लिए हेल्दी ट्रेंड नहीं है। जिनके ज्यादा नंबर्स नहीं आ पाते हैं, उनकी प्रॉपर काउंसिलिंग करके बताना चाहिए कि कम नंबर्स के बावजूद वे कैसे मीनिंगफुल लाइफ जी सकते हैं।
2.जेएस राजपूतकहते हैं कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिसमें टैलेंट का पैमाना केवल नंबर नहीं हो। बच्चों की प्रतिभा को सही ढंग से आंकने के लिए हमें एक प्रॉपर सिस्टम बनाना होगा।
3.डॉ. शिखा रस्तोगी (सीबीएसई में काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट) कहती हैं कि पैरेंट्स की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे नंबर्स को लेकर पैनिक होने के बजाय बच्चों को केवल अच्छी स्टडी करने को मोटिवेट करें। बच्चों में यह विश्वास जगाएं कि कम नंबर्स आने के बावजूद वे उनके साथ हैं और हमेशा साथ रहेंगे, क्योंकि जिंदगी नंबर्स से नहीं चलती।
::/fulltext::