देवी दुर्गा को भोग लगाने के लिए विशेष धातु या पात्र होना जरूरी है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि आखिर किस पात्र में मां को भोग लगाना चाहिए, इसके अलावा पुराने पीतल के बर्तन में भी भोग लगाया जा सकता है, लेकिन वह गंदा और टूटा ना हो..........
नवरात्रि की पूजा का जितना महत्व है उतना ही भोग का भी है. मां की पूजा अर्चना में कई बातों का विशेष ख्याल रखना होता है, जिसमें से एक है भोग को सही पात्र में लगाना. अकसर लोग माता दुर्गा को सोने, चांदी, तांबा, स्टील आदि धातु के पात्र में प्रसाद चढ़ा देते हैं, जो कि नहीं करना चाहिए. इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है. इसलिए देवी दुर्गा को भोग लगाने के लिए विशेष धातु का पात्र होना जरूरी है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि आखिर किस पात्र में मां को भोग लगाना चाहिए.
पीतल या मिट्टी के पात्र में ही माता दुर्गा को भोग लगाना चाहिए. यह पात्र शुभ माना जाता है. वहीं, पूजा करने के बाद प्रसाद तुरंत ग्रहण करना चाहिए और लोगों में भी वितरित करें. देवी देवताओं के पास ज्यादा देर प्रसाद रखना अच्छा नहां माना जाता है. इसके अलावा पुराने पीतल के बर्तन में भी भोग लगाया जा सकता है, लेकिन वह गंदा और टूटा न हो. कोशिश करें मिट्टी का बरतन उपयोग करें प्रसाद चढ़ाने के लिए. यह बेस्ट होता है.
कौन से हैं मां दुर्गा के 32 नाम
अब बात आती है कि मां दुर्गा के 32 नाम कौन से हैं, जिनकी जाप करके आप भय और दुख को दूर कर सकते हैं, तो यह इस प्रकार हैं-
- दुर्गा
- दुर्गार्तिशमनी
- दुर्गापद्विनिवारिणी
- दुर्गमच्छेदिनी
- दुर्गसाधिनी
- दुर्गनाशिनी
- दुर्गतोद्धारिणी
- दुर्गनिहन्त्री
- दुर्गमापहा
- दुर्गमज्ञानदा
- दुर्गदैत्यलोकदवानला
- दुर्गमा
- दुर्गमालोका
- दुर्गमात्मस्वरूपिणी
- दुर्गमार्गप्रदा
- दुर्गमविद्या
- दुर्गमाश्रिता
- दुर्गमज्ञानसंस्थाना
- दुर्गमध्यानभासिनी
- दुर्गमोहा
- दुर्गमगा
- दुर्गमार्थस्वरूपिणी
- दुर्गमासुरसंहन्त्री
- दुर्गमायुद्धधारिणी
- दुर्गमांगी
- दुर्गमता
- दुर्गम्या
- दुर्गमेश्वरी
- दुर्गभीमा
- दुर्गभामा
- दुर्गभा
- दुर्गदारिणी
