सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री का व्रत बहुत महत्व रखता है। मगर ऐसे में यदि पीरियड्स शुरू हो जाए तो वो असमंजस में पड़ जाती हैं। उन्हें ये दुविधा रहती है कि मासिक धर्म में वट सावित्री व्रत किया जाए या फिर नहीं। सबसे पहली बात आपको ये समझनी चाहिए कि पीरियड्स का आना एक प्राकृतिक नियम है। इसे आप शुभ या अशुभ के साथ जोड़कर न देखें। इस बार वट सावित्री का व्रत 19 मई को रखा जा रहा है।

यदि कोई सुहागिन महिला पहली बार वट सावित्री का व्रत रखने जा रही हैं और आपके मासिक धर्म शुर हो गए हैं तो आपको सलाह दी जाती है कि आप यह व्रत प्रारंभ न करें।
पहले भी रख चुकी हैं व्रत
यदि आप वट सावित्री का व्रत पहले भी कर चुकी हैं और इस बार आपको पीरियड्स आ गए हैं तो व्रत वाले दिन बाल धोकर स्नान कर लें। आप पूजा पाठ की किसी भी वस्तु को हाथ न लगाएं। इस दिन आप किसी दूसरी महिला से आप पूजा करवा लें। इस दिन वट सावित्री व्रत की कथा सुनने की प्रथा है। आप थोड़ी दूरी में बैठकर इस व्रत कथा को सुनें।
इस दिन सुहागिनें अपने पति के पैर धोती हैं। आप यह काम कर सकती हैं। महिला द्वारा पूजा के बाद जो जल बच जाये उससे आप अपने पति के पैर धो सकती हैं। आप उन्हें रक्षासूत्र बाँध कर टीका भी लगा सकती हैं। मगर भगवान के पूजा पाठ से जुड़ा कोई भी सामान आप न छुएं। साथ ही दूरी बनाकर रखें।
यदि आपके पीरियड्स का पांचवां दिन है तो आप स्नानादि करके सावित्री माता की पूजा कर सकती हैं। मगर आप पूजन सामग्री न छुएं। इस दिन बरगद के पेड की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इसमें त्रिदेव का वास होता है। आप पीरियड्स के पूरी तरह से समाप्त न हो जाने तक इस वृक्ष को स्पर्श न करें।
आप किसी दूसरी महिला से व्रत से जुड़े सभी विधान करा सकती हैं। आप व्रत करें और इससे जुड़े नियमों का पालन करें। आप बस पूजा की सामग्री को स्पर्श न करें। इस दिन कथा अवश्य सुनें। ऐसा करने से आपको वट सावित्री व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा।
