नागिन ने लिया नाग की मौत का बदला, पति-पत्नी को डसा....
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विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए भारत के प्रधानमंत्री मोदी व शेख हसीना शुक्रवार सुबह 10.30 बजे शांति निकेतन पहुंचे।
कोलकाता, राज्य ब्यूरो। रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेने पहुंचे पीएम मोदी ने छात्रों को सफलता का मंत्र दिया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को जो भी असुविधा हुई उसके लिए मैं माफी मांगता हूं। विश्व भारती विश्वविद्यालय के प्रांगण में मैं मंदिर में मंत्रोच्चारण करने जैसी ऊर्जा महसूस करता हूं। मैं इस विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के नाते आया हूं, मेहमान की तरह नहीं।''
गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को किया याद
पीएम मोदी ने कहा, ''मैं जब मंच की तरफ आ रहा था, तो ये सोच रहा था कि कभी इसी भूमि पर गुरुदेव के कदम पड़े होंगे। यहां कहीं आसपास बैठकर उन्होंने शब्दों को कागज पर उतारा होगा, कभी कोई धुन, कोई संगीन गुनगुनाया होगा, कभी महात्मा गांधी से लंबी चर्चा की होगी, कभी किसी छात्र को जीवन का मतलब समझाया होगा।'' उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के विचार आज भी
रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और जागरुकता की कमी के चलते लोग आज भी अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। यही कारण है कि पुराने समय से चला आ रही रूढ़ियां उतनी ही जीवंत हैं जितनी पहले हुआ करती थी। एक ऐसी ही मान्यता है जशपुर जिले के बगीचा थाना के सरबकोबी गांव की जहां गांव वाले भूतप्रेत को खरीदते और बेचते हैं। यही नहीं लोग यहां खुलेआम प्रेतबाधा की तस्करी करने की बात करते नजर आ जाते हैं।
गांव के लोग एक ऐसी किवदंती बताते हैं एक ऐसे भूत के बारे में बताते हैं जो करीब 3फीट का होता है और इस भूत को नाचना गाना काफी पसंद है। जब भी इस भूत की आहट होती है तो चारों ओर पारंपरिक वाद्ययंत्रों के थाप की गूंज सुनाई देनी लगती है और लोग भूत के स्वागत में झूमने लगते हैं। जिसे इस भूत को खरीदना होता है वह आगे आता है और उसे नियमानुसार बेच दिया जाता है। इस भूत की बहुत डिमांड है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जो भी इस भूत खरीदता है वो अचानक धनवान हो जाता है।
गाँव के बुजुर्गों की मानें तो उन्होंने अपनी आखों से मटिया भूत और उसके चमत्कार देखें हैं। गांव में भूत बेचने वाले नारायण यादव दावा करते हैं कि दुनिया में भूतप्रेत और आत्माओं का साया होता है। होता है। वे कहते हैं कि अगर दुनिया में भगवान है तो भूतप्रेत का भी अस्तित्व है। लेकिन अदृश्य होने के कारण हम उन्हें देख और छू नहीं सकते। लेकिन जानकार कहते हैं कि भूतप्रेत सिर्फ मन का वहम और अंधविश्वासमात्र है।
::/fulltext::रमजान का पवित्र महीना फिर से सभी पर अपनी तमाम रहमतों, बरकतों और सादतों के साथ जलवा अफ़रोज़ हो रहा है. इस पवित्र महीने में अल्लाह की तरफ से अपने नेक बन्दों पर रहमतों और बरकतों की बारिश होती है. फ़रिश्ते रोज़ादारों के लिए इबादत करते हैं. इस महीने में रोज़ादारों की दुनयावी भागीदारी कम हो जाती है. वे अपना ज्यादातर वक्त अल्लाह की याद, उसकी इबादत, क़ुरान की तिलावत और फ़रीज़ व नवाफिल की अदाएगी में गुज़ारते हैं. इनके ज़रिए वे अल्लाह से अपने तअल्लुक़ को बढ़ाते हैं. रोज़ा हुक़ूक़ुल्लाह के साथ-साथ हुक़ूक़ुल इबादत पर भी ज़ोर देता है. नाराज़ लोगों को मानाने और उनसे बेहतर ताल्लुक़ात बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है.
रोज़ा क्या है और किसे रोज़ा करना चाहिए ?
अरबी में रोज़ा को सौम कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है किसी चीज़ से रुकना और इसे त्यागना. शरिया में रोज़ा का अर्थ है- अल्लाह की इबादात करने के इरादे से, मनुष्य सुबह सूर्य निकलने से लेकर डूबने तक खाने पीने और जिन्सी ज़रूरत पूरी करने से रुका रहे.
दिल्ली के ओखला में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक संस्था जामिया इस्लामिया सनाबिल के वरिष्ठ शिक्षक मौलाना फजलुर्रहमान नदवी न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहते हैं कि रमज़ान का रोज़ा हर आक़िल और बालिग़ मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है. यह पागल, मजनूं और बीमार पर फ़र्ज़ नहीं है. वह कहते हैं कि बीमार व्यक्ति पर रोज़ा की फ़र्ज़ियत ख़त्म नहीं होती है, बल्कि बीमारी की स्थिति में उसे राहत दी गई है. वह अगले रमज़ान से पहले जब भी स्वस्थ हो जाए, शेष रोज़ा पूरा करे.
रोज़ा का उद्देश्य क्या है?
मौलाना नदवी का कहना है कि कुरान में रोज़ा का उद्देश्य तक़वा बताया गया है. तक़वा क्या है, इस पर मौनाला कहते हैं कि जब मनुष्य में यह सिफ़त पैदा हो जाए कि वह कोई काम करे तो यह देखे कि इस काम से अल्लाह राज़ी होगा या नहीं. अगर अल्लाह उस के इस काम से राज़ी होता है तो वह ये काम करे वर्ना उससे बाज़ आए. यानि कोई भी काम करते वक़्त मनुष्य उसमें अल्लाह की मर्ज़ी तलाश करे.
किन चीज़ों से रोज़ा पर पड़ता है असर ?
मौलाना कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति रोज़ा रखता है और झूठ बोलता है, चुगली करता है तो शरीयत की निगाह में यह तारिक सौम यानी रोज़ा न रखने वाला नहीं माना जाएगा. हां, रोज़ा रखने में जो असर मिलना चाहिए था उस में ज़रूर कमी आएगी.
कभी-कभार छोटे बच्चों को भी रखवाना चाहिए रोज़ा
यूं तो हर बालिग़ और अक़ील मर्द व औरत पर ही रोज़ा फ़र्ज़ है, लेकिन छोटे बच्चों में भी कभी-कभार रोज़ा रखने की आदत डालनी चाहिए. इस की हिकमत बताते हुए मौलाना कहते हैं कि जब कम उम्र में ही बच्चा रोज़ा रखने की आदत डालना शुरू कर देगा तो फिर बालिग़ होने के बाद उसे रोज़ा रखने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी. मौलाना कहते हैं कि सहाबा किराम अपने कम उम्र बच्चों से कभी-कभार रोज़ा रखवाते थे और बच्चों के हाथों में खिलौना थमा देते थे, ताकि बच्चे दिन भर खिलौने से खेलते रहें और इसमें उनका दिन आसानी से गुज़र जाए.