देश की आजादी में बचपन से में ही खुद को समर्पित करने वाले प्रदेश के 90 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेव प्रसाद पांडेय को पहली बार जेल में बिताए हुए पल आज भी याद आते हैं। नईदुनिया की खास मुलाकात में उन्होंने बताया कि उन दिनों को वे अक्सर याद करते हैं, जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामानंद दुबे और त्रेतानाथ तिवारी के साथ आजादी के दौरान बिताए थे। उन्होंने बताया कि वे इन्हीं लोगों को देखकर आजादी के लिए लड़ना सीखे थे।
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13 साल की उम्र में उन्हें पहली बार जेल हुई थी। इस अवसर पर देश के युवाओं को संदेश देते हुए वे बोले कि उनके जमाने में आशाएं कम थीं, रास्ते भी कम थे, लेकिन आज के समय में आशाएं ज्यादा हैं तो रास्ते भी ज्यादा हैं। कोई भी रास्ता बहुत सोच समझकर पकड़ना चाहिए। आज के युवा राजनीति का शिकार हो रहे हैं। आजादी के बाद देश का भौतिक विकास तो हुआ है, लेकिन नैतिक विकास नहीं हो रहा है। आजादी के समय लोगों के बीच जाति-धर्म का कोई भेदभाव नहीं था। हर वर्ग, हर समुदाय के लोग मिलकर लड़े तभी आजादी मिली थी। उन्हें इस बात का काफी दुख है कि आज की राजनीतिक पार्टियां निजी स्वार्थ के लिए लोगों को जाति धर्म के नाम पर बांट रही हैं।
