छत्तीसगढ़ : PSC-2017 प्री. परीक्षा पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट दोबारा जारी करें….
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रायपुर 15 मई 2018। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने PSC-2017 को लेकर एक बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को दोबारा जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने रिजल्ट को दी गयी चुनौती के मसले पर एक एक्सपर्ट टीम गठित जांच करने का भी निर्देश दिया है। 15 दिन के भीतर एक्सपर्ट टीम को आपत्तियों को जांच कर नया रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया गया है, अगर 15 दिन में जांच पूरी नहीं हो सकती है, तो 22 जून को होने वाली मेंस की परीक्षा को आगे टाल दिया जायेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से असंतुष्ट विनय अग्रवाल और अमित विश्वास ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दोबारा जारी किये गये मॉडल आंसर को चुनौती दी गयी थी। याचिका पर आज जस्टिस पी स्वयंकोशी की बैंच में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर वकील मतीन सिद्दीकी ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान मतीन सिद्दीकी की दलीलों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने कमेटी गठित कर माडल आंसर की आपत्तियों की जांच करने और फिर दोबारा रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही साथ ये भी कहा है कि अगर तय वक्त जांच पूरी नहीं होती है, तो 22 जून को होने वाली पीएससी-2017 की मेंस की परीक्षा को टाल दिया जाये।
दरअसल पीएससी ने 2017 की प्रारंभिक परीक्षा का मॉडल आंसर जारी किया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने दावा आपत्ति मंगाये गये थे। दावा आपत्ति के बाद 10 से 12 आंसरों के मार्क्स को डिलीट कर नये सिरे से रिजल्ट जारी किया गया। 10 से 12 सवालों के नंबर गायब होने की वजह से कई अभ्यर्थी मेंस के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाये। जबकि होता ये है कि सवालों के ज्यादा संख्या में गलत होने की वजह एवरेज मार्किंग की व्यवस्था होती है, लेकिन PSC ने सभी सवालों के नंबर ही डिलिट कर दिये। जिसके बाद सीनियर वकील मतीन सिद्दीकी के माध्यम से विनय अग्रवाल और अमित विश्वास ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया। जिस पर कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है।
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