छत्तीसगढ़ : बीमा क्लेम नहीं मिला तो किसानों ने कंपनी के नाम पर पोता गोबर.....
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सूखे से नुकसान की भरपाई के लिए राज्य के 62,525 किसानों ने 92 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल का बीमा कराया था।
बिलासपुर. ये तस्वीर बिलासपुर से लगे चिल्हाटी गांव की है। अनावारी रिपोर्ट में इस गांव को अतिसूखा की श्रेणी में रखा गया था। यहां के किसानों ने इस उम्मीद में फसल बीमा कराया कि कम से कम खेती में खर्च की गई रकम ही मिल जाए। लेकिन इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने किसी भी किसान को एक रुपए का भी क्लेम नहीं दिया। इससे नाराज किसानों ने गांव की दीवारों पर कंपनी के वॉलपेंट पर गोबर पोत दिया। उनका कहना है कि जो कंपनी इस भयानक सूखे में भी उन्हें क्षतिपूर्ति नहीं दे रही, उसका गांव में नाम क्यों रहे?
किसानों को एक से दो रुपए मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका
सूखे से नुकसान की भरपाई के लिए राज्य के 62,525 किसानों ने 92 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल का बीमा कराया था। 6.60 करोड़ रुपए बतौर प्रीमियम दिए गए। केंद्र व राज्य शासन ने भी अंशदान दिया। लेकिन कंपनी ने हजारों खातों में एक से दो रुपए जमा किए। अब कम क्षतिपूर्ति मिलने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई गई है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि मस्तूरी के चिल्हाटी और आसपास के कई गांवों में इस बार भीषण सूखा पड़ा था। खेतों में बीज के लायक भी धान नहीं उपजा। परेशान किसानों ने शनिवार को पहले सहकारी समिति चिल्हाटी में बैठक की और फिर दीवार पर लिखे बीमा कंपनी के प्रचार को गोबर से पोतना शुरू कर दिया। चिल्हाटी के रामवतार, चंद्रिका भारद्वाज, बृजलाल यादव सहित कई किसानों ने बताया कि सूखे के चलते 50 फीसदी ग्रामीण पलायन कर चुके हैं। अब वे मदद के लिए कलेक्टोरेट का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं।
