नवजोत सिंह सिद्धू : 30 साल बाद चैन से सोएंगे, SC ने दी राहत......
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स मामले में 1999 में ट्रायल कोर्ट ने हार्ट अटैक को गुरनाम सिंह की मौत का कारण मानते हुए सिद्धू और संधू को बरी कर दिया था. हालांकि 2006 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया और दोनों को 3 साल की सजा सुनाई थी.
1988 के गैर इरादतन हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ी राहत दे दी है. इस मामले में उन्हें बरी कर दिया गया है. हालांकि इससे जुड़े रोड रेज मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है. इस मामले में उन पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जस्टिस जे चेलामेश्वर और एसके कौल की बेंच ने सिद्धू को बरी कर दिया है. इस मामले में पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि सिद्धू को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. बता दें कि सिद्धू पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार में मंत्री हैं.
क्या है मामला
27 दिसंबर 1988 को सिद्धू और रुपिंदर सिंह संधू पटियाला में शेरनवाला गेट चौराहे के पास अपनी गाड़ी में बैठे हुए थे. उस वक्त गुरनाम सिंह और उनके दो साथी बैंक से रुपये निकालकर लौट रहे थे. गुरनाम सिंह ने सिद्धू से रास्ता देने लिए कहा लेकिन सिद्धू और संधू हटने को तैयार नहीं हुए. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहा सुनी हो गई, विवाद इतना बढ़ा कि सिद्धू ने गुरनाम सिंह की बुरी तरह पिटाई कर दी. सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.
कब क्या हुआ
पंजाब सरकार ने की थी कड़ी सजा देने की मांग
रोडरेज मामला पंजाब सरकार बनाम सिद्धू था. इस मामले में पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने दलील दी थी कि गुरनाम सिंह की मौत सिद्धू की पिटाई की वजह से ही हुई. वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाए.
