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रायपुर। बस्तर के जंगलों में पहली बार बरसात के मौसम में भी फोर्स नक्सलियों पर कहर बनकर टूट रही है। बरसात के दिनों में जब जंगल और सघन हो जाता है, नई झाड़ियां उग आती हैं तथा नदी नाले भर जाते हैं तब नक्सली आराम करते हैं। बरसात में जंगल में फोर्स का मूवमेंट आसान नहीं होता। इस मौके का फायदा उठाकर नक्सली इन दिनों नए कैडर की भर्ती करते हैं और जगह-जगह ट्रेनिंग कैंप लगाते हैं। लेकिन इस बार हालत जुदा हो गए हैं।
::/introtext::बस्तर आइजी विवेकानंद ने बताया कि हमने बरसात में विशेष ऑपरेशन की तैयारी पहले ही कर रखी थी। जवानों को खासतौर पर बरसते पानी में ऑपरेशन चलाने की ट्रेनिंग दी गई। वैसे हथियार और साजोसामान जुटाए गए जो बारिश में फोर्स के लिए जरूरी होते हैं। इसके बाद ऑपरेशन मानसून की योजना बनाई गई।
नक्सली बेपरवाह थे क्योंकि उन्हें उफान पर बहती नदियों को पार कर फोर्स के पहुंचने की उम्मीद नहीं थी। यहीं वे गच्चा खा गए। ऑपरेशन मानसून को भारी सफलता मिली है। एक जून से शुरू हुए इस अभियान के दरमियान फोर्स ने न सिर्फ नक्सलियों को मार गिराया बल्कि उनके पास से अति आधुनिक हथियार भी बरामद किए।
ऑपरेशन मानसून के दौरान अब तक कुल 25 नक्सली मारे जा चुके हैं। बस्तर के जंगलों से 60 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं जबकि प्रदेश भर में यह संख्या 145 बताई गई है। इस दौरान 15 नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। नक्सलियों के पास से 33 हथियार बरामद किए गए जिनमें तीन इंसास रायफल, कई पिस्टल और दूसरे हथियार भी शामिल हैं।
अंदरूनी इलाकों तक बन चुकी है पहुंच
दरअसल बस्तर में फोर्स की पहुंच अब उन इलाकों तक बन चुकी है जो पहले पहुंचविहीन माने जाते थे। पिछले कुछ सालों में दुर्गम जंगलों में सड़क और संचार तंत्र का विकास किया गया है। नक्सलियों के कोर इलाके तक फोर्स ने कैम्प डाल कर एरिया डॉमिनेशन कर लिया है। अब उन कैंपों से जंगल और पहाड़ में छिपे नक्सलियों तक पहुंचना आसान हो गया है। बरसात में जवानों को हेलीकॉप्टर की मदद नहीं मिल पा रही है लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं।
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