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रायपुर.मोवा के दुबे कॉलोनी में देश का पहला ऐसा मंदिर बनकर तैयार है, जहां भगवान बालाजी के तीनों स्वरूप के दर्शन श्रद्धालु कर पाएंगे। 77 फीट ऊंचे तीन मंजिला इस मंदिर का निर्माण आठ साल पहले शुरू हुआ था, जो अब जाकर पूरा हुआ है। शनिवार को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा। भगवान के तीनों स्वरूपों की प्रतिष्ठा की जाएगी। मंदिर में आकर्षक रंगरोगन के बीच नक्काशीदार मूर्तियों की मनोरम झांकी आकर्षण का केंद्र रहेगी। मंदिर को पूरे दक्षिण भारतीय थीम पर तैयार किया गया है। मंदिर के गुंबद से लेकर भूतल तक की कारीगरी में दक्षिण भारतीय मंदिरों की झलक मिलती है।
प्राण प्रतिष्ठा के लिए मुख्य मंदिर से आए आचार्य :प्राण प्रतिष्ठा संपन्न करवाने के लिए तिरुपति के वैध पाठशाला से मुख्य आचार्य गोडावर्ती अनंता वेंकटा दीक्षित स्वामी और वैध पाठशाला के दीक्षित आचार्य वेणु गोपाल आए हैं। इस मौके पर स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज नि:सृत कथा प्रवचन करेंगे। रात में दिलीप षडंगी अपने साथियों के साथ भजन की प्रस्तुति देंगे।
तीन तल के मंदिर में हर तल पर बालाजी का अलग रूप
श्री बालाजी जनकल्याण सेवा समिति के संस्थापक सदस्य डॉ. देवेंद्र नायक ने बताया कि 16 हजार वर्गफीट में मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर के निर्माण के दौरा वास्तुशास्त्र का पूरा ख्याल रखा है। मंदिर के प्रथम तल पर गरुडजी के साथ भगवान बालाजी विराजेंगे। दूसरे फ्लोर पर बालाजी भगवान की वैसी ही प्रतिमा स्थापित की जाएगी जैसी तिरुपति में की गई है। तीसरे तल पर कलश पर धनवंतरि रूप वाले बालाजी विराजित होंगे। मंदिर के ऊपर 5 फीट का कलश रूपी गुंबज भी आकर्षण का केंद्र होगा। मंदिर में स्थापित होने वाली तीनों प्रतिमाएं तिरुपति से लाई जा रही हैं।
तिरुपति के मूर्तिकारों ने बनाई हैं प्रतिमाएं
श्री बालाजी जनकल्याण सेवा समिति के संस्थापक सदस्य डॉ. देवेंद्र नायक बताते हैं कि देश-विदेश में जहां भी भगवान बालाजी की प्रतिमा प्रतिष्ठित की गई है। उन प्रतिमाओं को तिरुपति निवासी मूर्तिकारों के प्रिंसिपल कहे जाने वाले प्रमुख मूर्तिकार डी चक्रधारी के मार्गदर्शन में निर्मित किया गया है। वे देश-विदेश में अब तक अलग-अलग डिजाइन वाले 400 से अधिक मंदिर के लिए प्रतिमा का निर्माण कर चुके हैं।