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नई दिल्ली। रेलवे ने ट्रेनों में शौचालयों को अपग्रेड करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। करीब दो लाख से अधिक बायो टॉयलेट्स लगाए गए हैं। मगर, अभी भी एक चीज है, जिसे रेलवे ने जरा भी नहीं बदला है और वह है लोहे की चेन से बंधे स्टील के मग्गे। दरअसल, चोरी से रोकने लिए टॉयलेट मग को चेन से बांधा जाता है।
::/introtext::आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेनों से सबसे ज्यादा शौचालय मग चुराए जाते हैं। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने 2017-18 में अब तक जिसमें छत पंखे, लिनन की चद्दर, कंबल, शॉवर हेड्स और लोहे ग्रिल सहित 2.97 करोड़ रुपए की चल संपत्ति बरामद की, जिसमें टॉयलेट मग भी शामिल थे।
एक अधिकारी ने नाम न छापने का आग्रह करते हुए बताया कि ट्रेनों के टॉयलेट को अपग्रेड करना हमारे फोकस में है। हालांकि, हम हर शौचालय में स्वास्थ्य नल स्थापित कर रहे हैं, लेकिन वे चोरी हो सकता है। लिहाजा, उसके विकल्प के लिए जंजीर से बंधे मग को विकल्प के रूप में लगाया जाएगा। हालांकि, इससे रखरखाव की लागत में थोड़ी सी वृद्धि होगी।
रेलवे साल 2018-19 में शौचालय अपग्रेडेशन ड्राइव के अंतिम चरण के रूप में 80,000 जैव शौचालय स्थापित करने के लिए तैयार है। अप्रैल में संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक लाख 25 हजार बायो टॉयलेट्स को मार्च 2018 तक ट्रेनों में स्थापित किया जा चुका है।
इस प्रक्रिया को जनवरी 2011 में शुरू किया गया था। तब ग्वालियर-वाराणसी बुंदेलखंड एक्सप्रेस में 57 बायो टॉयलेट्स लगाए गए थे। अधिकारी ने बताया कि मार्च तक हमने 55,000 कोचों में से 34,500 रेलवे कोच में बायो टॉयलेट्स लगा दिए हैं। इस परियोजना को पूरा करने के लिए इस वर्ष लगभग 80,000 बायो टॉयलेट्स स्थापित किए जाएंगे।
रेलवे ने साल 2015-16 में 15,000 बायो टॉयलेट्स, साल 2016-17 में 34,000 बायो टॉयलेट्स और 2017-18 में 56,000 बायो टॉयलेट्स स्थापित किए गए थे। बैक्टीरिया का उपयोग करके बायो टॉयलेट्स मानव अपशिष्ट को विघटित करता है और इसे मीथेन और पानी में परिवर्तित करता है।
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