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जानिए मोदी के नामांकन से किस तरह पड़ेगा पूरे देश पर असर...
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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में नामांकन भरने के लिए जो खास प्लान बनाया है उसका असर लोकसभा चुनाव के शेष 4 चरणों की सभी 240 सीटों पर पड़ेगा। मोदी ने अपने नामांकन में प्रस्तावक के लिए चौकीदार, मुुुुसलमान और डोम को चुना है। इस अवसर पर शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे और जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उपस्थित रहेंगे। जानिए मोदी के नामांकन से किस तरह पड़ेगा पूरे देश पर असर...
क्या है डोम जाति से प्रस्तावक चयन का राज : प्रधानमंत्री मोदी ने नामांकन में एक प्रस्तावक डोम जाति से लिया है। डोम को समाज की सबसे निम्न और तिरस्कृत जाति माना जाता है। इस समाज के लोग पहले गांव से बाहर रहा करते थे। मोदी ने इस तरह मध्यम निचली जातियों को साधने के लिए ही डोम समाज से प्रस्तावक लिया है। वह यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि वह समाज की हर जाति के साथ हैं।
इसलिए चुना चौकीदार : पीएम मोदी ने 'मैं हूं चौकदार' कैंपन को पिछले चुनाव में चलाए गए 'चायवाला' कैंपेन की तरह ही चलाया है। उन्होंने एक प्लानिंग के तहत सोशल मीडिया पर इस शब्द को इस तरह प्रसारित किया कि यह नारा देश के हर व्यक्ति तक पहुंचे। इस तरह वह राष्ट्रवाद को भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में सफल रहे। अब उन्होंने चौकीदार को अपना प्रस्तावक भी बनाया है। इस तरह वह यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि वह देश के चौकीदार हैं। मोदी के इस दांव ने विपक्ष को भी हैरान कर दिया है।
मुसलमानों साधने की कवायद : मोदी ने अपने प्रस्तावकों में मुसलमान को चुनकर पूरे देश के मुसलमानों को भी साधने का प्रयास किया है। तीन तलाक मुद्दे पर पहले से नाराज चल रहे इस वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलना उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
नीतीश के आने का यह होगा असर : बिहार में भाजपा और जदयू मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें वहां महागठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। नीतीश के मोदी के नामांकन के समय मौजूद रहने से बिहार के साथ ही पूरे देश में मौजूद बिहारी मतदाताओं पर सकारात्मक असर होगा।
उद्धव आए, अब नाराज नहीं है शिवसेना : मोदी के नामांकन से यह संदेश भी मिल रहा है कि भाजपा और शिवसेना के तल्ख संबंध अब अतीत की बात हो गई है। दोनों दल अब पूरी तरह साथ है और लंबे समय तक साथ ही रहेंगे। इससे महाराष्ट्र के मतदाताओं पर सकारात्मक असर पड़ेगा और राज्य में दोनों ही दलों की स्थिति मजबूत होगी।
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