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रायपुर। कैशलेस इकोनामी को बढ़ावा देने के लिए की गई सरकार की पहल को झटका लगने लगा है। कैशलेस मार्केट घोषित होने के बाद भी कैश कारोबार हावी है। रोजाना बमुश्किल 20 फीसद कैशलेस ट्रांजेक्शन ही हो पा रहा है।
::/introtext::साल 2016 के अंत में आई नोटबंदी के बाद बाजार में कैश की दिक्कत को देखते हुए कैशलेस ट्रांजेक्शन पर जोर दिया गया और स्वाइप मशीनों के साथ पेटीएम को बढ़ावा दिया गया। कैश की दिक्कत के चलते कुछ महीने तो स्वाइप ट्रांजेक्शन काफी हुआ, लेकिन मार्केट में कैश फ्लो होते ही, व्यापारी और उपभोक्ता दोनों कैशलेस ट्रांजेक्शन को भूल गए, यहां तक बैंक भी।
मालूम हो कि उस दौरान रायपुर जिले के व्यापारियों ने करीब 20 हजार स्वाइप मशीनों की मांग बैंकों से की थी, लेकिन बैंक समय पर उपलब्ध नहीं करा पाए। कुछ दिनों बाद बाजार में कैश का फ्लो काफी बढ़ गया तो व्यापारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
मालवीय रोड व्यापारी संघ के अध्यक्ष व चेम्बर उपाध्यक्ष राजेश वासवानी का कहना है कि रोजाना के कारोबार को देखा जाए तो बमुश्किल 20 फीसद कारोबार कैशलेस होता है। बैंक अफसरों का कहना है कि व्यापारी अब मशीन लेने से इन्कार कर रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की कोशिश बैंकों द्वारा की जा रही है साथ ही उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है।
कैशलेस को झटका लगने के ये माने जा रहे कारण-
1. सबसे बड़ा कारण बैंकों द्वारा लिए जाने वाले चार्जेस को माना जा रहा है। चार्जेस के चलते व्यापारी स्वाइप ट्रांजेक्शन से कतराते हैं।
2. दूसरी बड़ी समस्या सर्वर खराबी की आती है। अधिकांश समय सर्वर ठप होने की समस्या के कारण स्वाइप नहीं हो पाता, मशीनें खराब हो जाती हैं।
फैक्ट फाइल-
- कैश की दिक्कत आने पर जनवरी 2017 में रायपुर जिले में करीब 20 हजार स्वाइप मशीनों की मांग हुई थी।
- बैंकों द्वारा स्वाइप मशीन उपलब्ध कराने में देरी के कारण मार्केट पर पेटीएम ने कब्जा कर लिया, लेकिन पेटीएम भी कम हो गया।
- कैश का फ्लो सुधरने पर व्यापारी मशीन लेने से कतराने लगे।
कैशलेस ट्रांजेक्शन को ऐसे मिलेगा बढ़ावा
- अगर सरकार वाकई में कैशलेस इकोनामी को बढ़ावा देना चाहती है तो उसे कुछ प्रमुख काम करने होंगे। व्यापारियों के साथ उपभोक्ता भी कैशलेस इकोनामी चाहते हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना है तो बैंकों द्वारा क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पर लिए जाने वाले चार्ज का पूरी तरह समाप्त करना होगा। सरकार को इसके लिए पहल करनी होगी। बैंकों में एनईएफटी व आरटीजीएस की सुविधा सालभर जारी रहनी चाहिए। इससे बैंकों को भी फायदा मिलेगा और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कैट पहले भी यह सुझाव दे चुका है। अगर इन सुझावों को अमल में लाया जाता है तो निश्चित ही कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। - अमर पारवानी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,कैट
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