सरदार पटेल ने RSS को किया था बैन, संघ के विरोधी तो नहीं लेकिन विचारधारा आकर्षित भी नहीं करती थी....
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पटेल संघ के विरोधी तो नहीं थे, लेकिन उसकी हिन्दू राष्ट्र या मुस्लिम विरोधी विचारधारा पटेल को आकर्षित भी नहीं करती थी।
- महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने संघ पर लगाई थी रोक।
- संघ की गतिविधियों के कारण बना गांधी विरोध का माहौल - पटेल
- पटेल ने कहा था - संघ की गतिविधियां सरकार और राज्य के लिए खतरा
पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रणब मुखर्जी गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दीक्षांत समारोह का हिस्सा बन रहे हैं। कांग्रेस नेताओं में इस फैसले को लेकर नाखुशी देखने को मिल रही है। हालांकि, ये कोई पहली बार नहीं हो रहा है। राजनीति में ऐसे मौके कई बार देखने को मिलते हैं, जब नेता कट्टर विरोधी विचारधारा वाले लोगों के भी साथ खड़े दिखे। शायद यही वजह रही कि नरेंद्र मोदी पर भी सरदार वल्लभभाई पटेल की विचारधारा को कांग्रेस से छीनने के आरोप लगे। जबकि पटेल वही लीडर हैं, जिन्होंने कभी संघ पर रोक लगाई थी।सरदार पटेल आजादी के आंदोलन का बड़ा चेहरा थे। इन्होंने देश को एक करने में अहम भूमिका निभाई थी। पर उन्हें आरएसएस की देशभक्ति ठीक नहीं लगती थी। वो संघ के विरोधी तो नहीं थे, लेकिन उसकी हिन्दू राष्ट्र या मुस्लिम विरोधी विचारधारा पटेल को आकर्षित भी नहीं करती थी। कई मौकों पर इसे लेकर उनके विचार भी दुनिया ने देखे थे।
संघ पर प्रतिबंध
महात्मा गांधी की हत्या के बाद तो ये मौका भी आया था कि पटेल ने 4 फरवरी 1948 को आरएसएस पर प्रतिंबध लगा दिया था। उस वक्त वो देश के गृह मंत्री थे। उन्होंने प्रतिबंध लगाते हुए चिट्ठी में कहा था, ''इसमें कोई दो राय नहीं कि आरएसएस ने हिन्दू समाज की सेवा की है। जहां भी समाज को जरूरत महसूस हुई, वहां संघ ने बढ़-चढ़कर सेवा की। ये सच मानने में कोई हर्ज नहीं है। पर इसका एक चेहरा और भी है, जो मुसलमानों से बदला लेने के लिए उन पर हमले करता है। हिन्दुओं की मदद करना एक बात है, लेकिन गरीब, असहाय, महिला और बच्चों पर हमला असहनीय है।''
हत्या में सीधा हाथ होने से किया था इनकार
हालांकि, महात्मा गांधी की हत्या और संघ पर प्रतिबंध लगाए जाने के करीब महीने भर बाद पटेल ने नेहरू को 27 फरवरी, 1948 को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में पटेल ने लिखा कि संघ का गांधी की हत्या में सीधा हाथ तो नहीं है लेकिन ये जरूर है कि गांधी की हत्या का ये लोग जश्न मना रहे थे। पटेल के मुताबिक गांधी की हत्या में हिंदू महासभा के उग्रपंथी गुट का हाथ था।
मुखर्जी को दिया था करारा जवाब
- जनसंघ की स्थापना करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्दी ने जुलाई 1948 में पटेल को एक चिट्ठी लिखी। इसमें आरएसएस से प्रतिबंध हटाने की मांग की गई थी।
- इस पर पटेल ने 18 जुलाई 1948 को जवाब दिया कि महात्मा गांधी की हत्या का मामला कोर्ट में है इसलिए वो इसपर कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि, पटेल ने अपने पहले के बयानों का हवाला देते हुए साफ कर दिया कि भले ही गांधी हत्या में संघ का सीधा हाथ नहीं था लेकिन संघ के कारण ऐसा माहौल बना जिससे गांधी की हत्या हुई। पटेल ने आगे लिखा कि संघ की गतिविधियां सरकार और राज्य के अस्तित्व के लिए जोखिम भरी थीं।
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