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भिलाई। शिवनाथ तट पर सोमवार सुबह श्री चंद्रप्रभ तीर्थ की स्थापना पर भगवान पार्श्वनाथ और सुब्रतनाथ के साथ भगवान चंद्रप्रभ की 21 फीट 3 इंच प्रतिमा स्थापित की गई। 11 हजार मंत्रोच्चार के बीच यह प्रतिमा स्थापना हुई। यह प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में देश की सबसे बड़ी प्रतिमा है।
::/introtext::पार्श्व तीर्थ नगपुरा तीर्थ के बाद प्रख्यात जैन तीर्थों की सूची में अब दुर्ग का नाम भी शामिल हो जाएगा। देशभर से भगवान चंद्रप्रभ के अनुयायी स्थापना उत्सव में शामिल हुए। श्री दिगंबर जैन पंचायत द्वारा आयोजित स्थापना उत्सव सुबह छह बजे से ही शुरू हो गई।
श्री 1008 भगवान चन्द्रप्रभ भगवान की प्रतिमा श्री नसिया जी में विराजमान हुई। मंत्र जाप के बाद हवन व पूजन हुआ। उसके बाद पटेल चौक में कमल पाटनी परिवार द्वारा भगवान चन्द्रप्रभ की मूर्ति का अनावारण किया गया।
श्री दिगंबर जैन मंदिर से अनिता बाकलीवाल, ममता पाटनी, मीना पाटनी, शीतल गोधा द्वारा घट यात्रा प्रारंभ हुई जो पटेल चौक में भगवान की शोभायात्रा के साथ प्रारंभ होकर गंजपारा चौक होते हुए नसिया जी तीर्थ क्षेत्र में पहुंची। मूर्ति के दर्शन के लिए कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व अन्य प्रांतों से लोग शोभायात्रा में शामिल हुए।
वेदीशुद्धि के साथ हुई प्रतिष्ठा
इस दौरान वेदी शुद्धि का कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में स्वर्ण व चांदी के स्वातिक की प्रतिष्ठा हुई। ओमलता बोहरा परिवार द्वारा वेदी में भगवान के नीचे पारा डाला गया। कार्यक्रम में विधायक अरूण वोरा, प्रताप मध्यानी, सोहन जैन, ऋषभ जैन, धीरज बाकलीवाल, कमल पाटनी, ज्ञानचंद पाटनी, महावीर गंगवाल व महिला मंडल आदर्श महिला मंडल की समस्त सदस्य उपस्थित रहीं।
आज के कार्यक्रम में मंच संचालन जिनेन्द्र पाटनी ने किया। मौके पर राकेश छाबड़ा, दिलीप बाकलीवाल, पंकज छाबड़ा, अनिल गोधा, संदीप लुहाड़िया, मनोज बाकलीवाल, रमेश सेठी, सुनील लुहाड़िया, राकेश सेठी, का योगदान रहा।
बिजौलिया पत्थर से बनी है मूर्ति
चंद्रप्रभ भगवान की 21 फीट 3 इंच की मूर्ति के प्रदाता देवेन्द्र सजल काला परिवार है। इन्होंने यह मूर्ति श्री नसिया जी तीर्थ क्षेत्र को प्रदान की है। ज्ञातव्य हो कि मूर्ति बिजौलिया पत्थर की बनी है। कार्यक्रम के दौरान सुबह व शाम वात्स्ल्य भोजन समाज द्वारा रखा गया था। सायंकाल के भोजन के दाता धूपचंद, अनिल छाबड़ा व भोजन प्रभारी अजय सेठी, ज्ञानचंद गंगवाल व दीपक लुहड़िया थे।
पूजन कार्यक्रम के उपरांत मूर्ति रखने का कार्य सुबह 11 बजे से प्रारंभ हुआ था, लेकिन मूर्ति का वजन लगभग 80 टन होने के कारण शाम 4 बजे मूर्ति विराजमान हो पायी। मूर्ति विराजमान होने पर समस्त समाज भावविप्ल हो गया था। दिगंबर जैन समाज के समस्त व्यापारियों ने अपने व्यापार बंद कर रखा।
बाउंड्रीवाल के लिए की 11 लाख की अनुशंसा
विधायक अरुण वोरा सोमवार को दिगम्बर जैन खण्डेलवाल पंचायत दुर्ग द्वारा आयोजित चन्द्रप्रभ भगवान की स्थापना रैली में शामिल हुए और दिगंबर जैन समाज की मांग पर तत्काल 11 लाख रुपए के बाउंड्रीवाल निर्माण को स्वीकृति दी।
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