छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रुट मैप बनाया है जिस पर चलते हुए पार्टी प्रत्याशी का चयन करेगी....
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रायपुर। चुनाव को लेकर अब बेहद कम समय बचा है, हर दल की क़वायद अपने अंतिम चरण पर है। ऐसे में सवाल और उत्सुकता इस पर भी जा टिकी है कि, आख़िर प्रत्याशियों का क्या होना है, याने चयन कैसे होगा ? उनकी लोकप्रियता,स्वीकार्यता और क्षेत्र में काम करने का पैमाना किस तरह आँकते हुए टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस ने इसके लिए जो रुट मैप बनाया है जिस पर चलते हुए पार्टी प्रत्याशी का चयन करेगी, वह अगर वैसा ही रहा जैसा कि तय किया गया है तो वह बेहद दिलचस्प तरीक़ा होगा।संगठन ने हालाँकि एक बात बहुत स्पष्ट तरीक़े से नेताओं और कार्यकर्ताओं तक पहुँचाई है “परिक्रमा से टिकट नही मिलेगा” यदि ऐसा ही है कि परिक्रमा वादियों को या कि बड़े नेताओं की सिफ़ारिश भी काम नही आएगी तो इस बार कांग्रेस का फ़ार्मुला क्या है तो हम बताते है आपको कि वह फ़ार्मुला क्या है। कांग्रेस की जो रणनीति है कि किसे टिकट मिले उसके लिए छ चरण हैं।और वह पूरे छ चरण प्रारंभिक प्राथमिक स्तर के कार्यकर्ता से ही शुरु होते हैं। यह छ चरण है -अनुभाग,मतदान केंद्र,सेक्टर,ज़ोन,ब्लॉक और फिर जिला कमेटी।याने कि वे नाम जिन्हें कि दावेदार माना जाएगा और जो स्टेट कमेटी से होते हुए स्क्रीनिंग कमेटी तक जाएँगे वे नाम बूथ लेव्हल से भी नीचे अनुभाग स्तर से शुरु होते हुए उपर तक आएँगे। मतलब यह है कि, जो दावेदार है उसकी उपस्थिति उसकी राजनैतिक सक्रियता और स्वीकार्यता का पैमाना सबसे शुरुआती पायदान से तय किया जाएगा।
यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि यह रणनीति केवल उन 51 सीट पर ही नही है जहाँ कि कांग्रेस 2013 में हारी बल्कि सभी 90 पर है। हालाँकि जिन जगहों पर कांग्रेस विधायक मौजुद हैं उनके लिए रणनीति में बहुत थोड़ा सा परिवर्तन हैं, नाम तो उसी छ चरण की प्रक्रिया से आएँगे लेकिन उसमें आंशिक दखल स्टेट कमेटी का होगा, वह दखल भी हर विधानसभा में बूथ लेव्हल तक की हो रही बैठकों से मिलने वाला फ़ीडबैक के आधार पर होगा। यह भी शर्तिया है कि, जिन 39 सीटों पर कांग्रेस के विधायक मौजुद हैं, टिकट उनमें से करीब तेरह की ख़तरे मे है। इधर इस पूरी क़वायद को लेकर पीसीसी ने मौन साधे रखा है, और ज़ीरो परसेंट डाल्यूशन और हंड्रेड परसेंट इंप्लीमेंशन के फ़ार्मुले पर काम कर रही है।याने कोई मुद्दा रोका नही जाएगा और शत प्रतिशत आक्रामक तेवर बने रहेंगे।
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