रायपुर. लगता है मोर्चा का पूरा तमाशा बनाकर ही ये नेता मानेंगे। पिछले तीन महीने से ना तो मोर्चा में एकता है और ना ही तालमेल, बावजूद आये दिन मोर्चा के नाम पर आयोजन का दावा होता है, जिसका बाद में उनके नेता ही हवा निकाल देते हैं। पिछले कई आयोजन गवाह हैं, जिसके लिए मीडिया में विज्ञप्ति पांचों संगठन के नाम से जारी हुआ, लेकिन पता चला आपस में ही इसकी एक राय नहीं बन पायी। चाहे चीफ सिकरेट्री से मिलने की बात हो या फिर महासम्मेलन के आयोजन का ऐलान हो। मोर्चा के नाम पर अपनी डपली-अपनी राग की जो कहावत चल रही है, वो फिलहाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
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इन सब नाटकीय घटनाक्रम के बीच ताजा ट्विस्ट ये आया है कि चंद्रदेव राय ने व्हाट्सएप ग्रुपों में मोर्चा के नाम से 24 अगस्त को प्रांतीय बैठक आयोजित करने की बात कही है। दिलचस्प बात ये है कि चंद्रदेव राय, विकास राजपूत, केदार जैन, विरेंद्र दुबे और संजय शर्मा के नाम से जारी किये गये मैसेज को लेकर मोर्चा में ही आपस में राय नहीं है। पुख्ता जानकारी मिली है कि संजय शर्मा का संगठन इस बैठक में शामिल नहीं हो रहा है। हालांकि हमने विरेंद्र दुबे से भी देर रात बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
पांचो संगठन अपनी डपली-अपनी राग बजाते नजर आते हैं। चंद्रदेव राय और विकास राजपूत ने मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया, तो इधर संजय शर्मा संगठन, वीरेंद्र दुबे संगठन और केदार जैन संगठन ने एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें तान ली। खुलकर सोशल मीडिया पर तीनों की तकरार उजागर हुई। रही-सही कसर पिछले दिनों संजय शर्मा के संगठन के महासम्मेलन आयोजित करने के ऐलान के बाद पूरी हो गयी। क्योंकि उसके बाद विरेंद्र दुबे के गुट ने नाम लिये बिना संजय शर्मा के संगठन पर हमला बोल दिया।
ये बैठक 24 अगस्त को शाम 4 बजे रायपुर के कलेक्टरेट गार्डेन में बुलायी गयी है। लेकिन बैठक के पहले ही पांच संगठनों में से एक संगठन के बैठक से अलग हो जाने के बाद अब फिर से एक मोर्चा की एकता सवालों के घेरे में हैं। हालांकि सवाल ये भी उठ रहा है कि जब मोर्चा की आपस में बन नहीं रही है, तो फिर मोर्चा का औचित्य रह क्या जाता है। ऐसे देखा जाये तो संजय शर्मा का संगठन जहां महासम्मेलन की तैयारी कर रहा है, तो वहीं विरेंद्र दुबे ये ऐलान कर चुके हैं कि महासम्मेलन या नहीं तो महाआंदोलन…वहीं चंद्रदेव राय और विकास राजपूत वर्ग तीन के वेतन विसंगति और वर्ष वंधन को लेकर एकला चलो रे की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। केदार जैन खुद पहले ये बता चुके हैं कि मोर्चा को हाईजैक करने की कोशिश हो रही है। ऐसे में मोर्चा का तो भगवान ही मालिक नजर आ रहा है।
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