Wednesday, 12 August 2026

व्हाट्सऐप एडमिन होना कितना रिस्की?

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Whatup Admn : ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज शेयर होने पर आप जेल भी जा सकते हैं।..... 

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ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज शेयर होने पर आप जेल भी जा सकते हैं। अग़र यक़ीन न हो तो मध्य प्रदेश के राजगढ़ ज़िले का ये मामला आपको चौंका सकता है। एक व्हाट्सऐप मैसेज के लिए जुनैद ख़ान पिछले पांच महीने से जेल में है। हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि वो मैसेज क्या था और जुनैद के घरवालों का ये कहना है कि उन्होंने ये मैसेज नहीं भेजा था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ 21 वर्षीय जुनैद पर आपत्तिजनक मैसेज के आधार पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया है।

व्हाट्सऐप की क़ानूनी जिम्मेदारी
 
पुलिस का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराए जाने के समय जुनैद इस व्हाट्सऐप ग्रुप के एडमिन थे। जबकि जुनैद के परिवारवालों का कहना है कि जुनैद डिफॉल्ट एडमिन बन गए क्योंकि पहले वाले एडमिन ने ग्रुप छोड़ दिया था। ये मामला व्हाट्सऐप एडमिन की क़ानूनी जिम्मेदारियों और खुद इस प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका पर नए सिरे से बहस छेड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील विराग गुप्ता कहते हैं, "आतंकग्रस्त जम्मू और कश्मीर के एक ज़िले में व्हाट्सऐप एडमिन का रजिस्ट्रेशन करना ज़रूरी कर दिया गया है। दूसरी तरफ़, व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म की क़ानूनी जिम्मेदारी पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है।" वे कहते हैं कि इन परिस्थितियों में बगैर आपराधिक भूमिका को सुनिश्चित किए व्हाट्सऐप एडमिन को पांच महीने तक जेल में रखना क़ानून सम्मत नहीं कहा जा सकता है। ये सवाल उठता है कि अगर व्हाट्सऐप एडमिन को जेल तो व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म को क्लीन चिट क्यों।
 
क्या है मामला?
 
मध्य प्रदेश के राजगढ़ के तालेन के रहने वाले जुनैद ख़ान बीएससी सेकेंड ईयर के छात्र हैं। पुलिस ने उन्हें 15 फरवरी, 2018 को व्हाट्सऐप ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज फारवर्ड होने के आरोप में गिरफ्तार किया। जुनैद के घरवालों का कहना है, "ये मैसेज एक नाबालिग ने फॉरवर्ड किया था। लेकिन इसकी शिकायत होते ही ग्रुप का एडमिन इससे बाहर हो गया। उसके बाद दो अन्य लोग भी बाहर हो गए जिसकी वजह से जुनैद ग्रुप के एडमिन बन गए।" "इस पूरी घटना के दौरान वह तालेन से बाहर रतलाम में थे जहां पर वह अपने किसी रिश्तेदार की शादी का कार्ड देने गए थे।" "जुनैद के लौटने के बाद उनके ख़िलाफ आईटी एक्ट के साथ, राजद्रोह का मामला दर्ज कर दिया गया। जेल में होने की वजह से जुनैद बीएससी की परीक्षा भी नहीं दे पाए। वहीं एक अन्य आईटीआई की परीक्षा उन्होंने जेल में ही दी।"

क्या कहता है क़ानून?
 
आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत धार्मिक या राजनीतिक रूप से आपत्तिजनक संदेश फैलाने पर क़ानूनी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) प्रकाश मिश्रा ने बताया, "इस मामले में चालान पेश किया जा चुका है। पूरी जांच के बाद ही चालान पेश किया गया है। अगर परिवार को लगता है कि इसमें कुछ गड़बड़ी है तो वह अदालत में सबूत पेश कर सकते है। आगे जो भी जांच होगी वह न्यायालय के आदेश पर ही हो सकती है।"
 
देश में इस समय 20 करोड़ सक्रिय व्हाट्सऐप यूजर्स हैं। ये देखा गया है कि ऐसे कई मामलों में होने वाली गिरफ़्तारियों के केंद्र में व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल था। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया के ज़रिए हिंसा भड़काने से रोकने के लिए क़दम उठाए जा रहे हैं। हालांकि दूसरी तरफ़ आलोचक इस ओर ध्यान दिलाते हैं कि पुलिस इन क़ानूनों का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को दबाने के लिए कर रही है।
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