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दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल को फटकार लगाई.
नई दिल्ली: दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल को फटकार लगाई. राज्यपाल पर बरसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप कह रहे हैं कि हर मामले के हम प्रभारी हैं, सुपरमैन हैं. लेकिन लगता है कि आप कुछ करेंगे नहीं. आपको लगता है कि आपको कोई छू नहीं सकता. आप संवैधानिक पद पर हैं. जब कोई काम आता है तो आप बस पास कर देते हैं कि ये उसकी जिम्मेदारी है.
राज्यपाल पर बरसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि आपके अफसर मुद्दों पर मीटिंग में जाने की जहमत नहीं उठाते हैं. यहां तक आपको लग रहा है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कुछ नहीं हैं, जो कुछ हूं मैं हूं. आपके अफसर उनकी मीटिंग में नहीं जाते हैं. जाहिर है एलजी यह सोचते होंगे कि वह ही अथॉरिटी हैं. फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर मामले में मुख्यमंत्री को मत घसीटिए. आपको सिंपल अंग्रेजी में ये बताना है कि कूड़े का पहाड़ कब हटाएंगे. दरअसल एमिक्स क्यूरी कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि मीटिंग में तय हुआ था कि रोज़ाना 2 बार सफाई होगी. सफाई के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य अधिकारियों के नाम वेब साइट पर होंगे. ज़िम्मेदारी तय हो. सज़ा का प्रावधान हो. मगर उपराज्यपाल सफाई से संबंधित मीटिंग में न खुद आए न ही नुमाइंदे को भेजा. कोर्ट बस इसी बात पर नाराज हो गया. कोर्ट ने पूछा कि हलफनामे में LG ने अधिकार और ज़िम्मेदारी की बात की है. कचरे और साफ-सफाई के मामले में उनकी जिम्मेदारी है या नहीं? हां या ना?. इस पर एलजी की ओर से ASG पिंकी आनन्द ने कहा- हां! LG को डायरेक्शन जारी करने का अधिकार 487 के तहत है. इसके बाद कोर्ट ने पूछा कितने निर्देश जारी किए?
सुप्रीम कोर्ट ने दो बजे ये बताने को कहा है कि तीनों लैंडफिल पर कूड़ा बीनने वालों को पहचान पत्र व यूनिफार्म कब तक दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को 2015 से सुन रहे हैं. लग रहा है कि आगे भी तीन साल लग जाएंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एलजी ने हलफनामा दाखिल किया है. इसके मुताबिक, कचरा प्रबन्धन के लिए नगर निगम जिम्मेदार है, जो सरकार के अधीन है और वही इसके प्रभारी हैं. 239 AAके तहत भी निगम की ज़िम्मेदारी है. पूर्वी निगम में गाजीपुर, दक्षिणी में ओखला और उत्तर में भलस्वा लैंड फिल साइट्स हैं. LG अपने स्तर पर ठोस कचरा निपटान पर अधिकारियों की मीटिंग लेते रहे हैं. बाइलॉज भी जारी किया गया है. कोर्ट ने केंद्र और LG के लिए पेश ASG पिंकी आनंद से पूछा कि एक्शन की टाइमलाइन बताएं. अब तक 25 मीटिंग हुईं, 50 कप चाय पी, इसका हमारे लिए कोई मतलब नहीं. आप LG हैं. आपने मीटिंग की हैं. टाइमलाइन और स्टेटस रिपोर्ट दें.
दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन, डेंगू, चिकनगुनिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. मंगलवार को दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि दिल्ली में कूडा प्रबंधन को लेकर जिम्मेदारी किसकी? मुख्यमंत्री की या LG की या केंद्र सरकार की. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से बुधवार तक हलफनामा दाखिल कर बताएं कि कूडा प्रबंधन को लेकर कौन जिम्मेदार है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी हुए कहा कि दिल्ली में कूड़े का पहाड़ बन गया है लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नही है. कोर्ट ने कहा है कि लोग डेंगू, चिकनगुनिया, और मलेरिया से मर रहे है लेकिन कोई राज्य सरकार इसको लेकर गम्भीर नही है. सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब संसद द्वारा सही तरीके से लागू नही हो पाता तो कोई भी नियम देश मे कैसे लागू हो सकता है.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दाखिल 850 पेज़ के हलफ़नामे को कहा कि ये खुद में सॉलिड वेस्ट है और हम कचरा ढोने वाले नही है. अगर दिल्ली को सफाई के मामले में रोल मॉडल मांगेंगे तो आप गलत है और ये प्रदूषण को लेकर भयावह हालात है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि ऐसे ऑफिसर भेजिए जिसको पता हो. कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के हलफ़नामे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हम आदेश देते है लेकिन कोई उसे लागू नही करता. दरअसल सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है.