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लाल आतंक के सूर्यास्त के साथ सुकमा में उदय हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का सूरज
मेगा स्वास्थ्य शिविर में उमड़ा जनसैलाब
स्वास्थ्य शिविर में 6,500 से अधिक लोगों ने लाभ लिया
रायपुर 07 अप्रैल 2026/ मेगा हेल्थ कैंप एक प्रमुख निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर है, जहाँ नामी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, और नेत्र रोग जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयां प्रदान करते हैं। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग वितरण और आधुनिक जांचकी सुविधाएं भी मिलती हैं। लाल आतंक की समाप्ति के इस दौर में जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है, तब प्रशासन की पहुँच अंतिम छोर के व्यक्ति तक आसान हुई है।
जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर का गत दिवस आयोजन किया गया। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के द्वारा शुभारंभ पश्चात इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में उन संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों के 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर पहुँचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे। कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित उक्त मेगा स्वास्थ्य शिविर में कुल 6,500 से अधिक लाभार्थियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब ग्रामीण बंदूकों के साये से निकलकर आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श पर भरोसा जता रहे हैं। शिविर के दौरान 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य योद्धाओं की टीम ने इन वनवासियों के लिए देवदूत बनकर काम किया।
बस्तर के सुदूर अंचलों में कभी लाल आतंक की धमक से सहमे रहने वाले सुकमा जिले की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। दशकों पुराने संघर्ष और भय के बादलों को चीरकर अब यहाँ विकास और खुशहाली की नई किरणें बिखर रही हैं। जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अब सुकमा नक्सलवाद की बेड़ियों को तोड़कर स्वस्थ और सशक्त होने की राह पर निकल पड़ा है। मिनी स्टेडियम में विगत 28 और 29 मार्च को आयोजित इस शिविर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जहाँ कभी गोलियों की गूँज थी, आज वहाँ सेवा और संकल्प के गीत गाए जा रहे हैं।
शिविर में केवल सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर समस्याओं का भी विशेषज्ञ उपचार किया गया। नक्सलवाद के दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे बुजुर्गों के लिए 989 चश्मों का वितरण किया गया, जिससे उनकी धुंधली दुनिया एक बार फिर रोशनी से भर उठी। वहीं 1,500 बच्चों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण कर आने वाली पीढ़ी को कुपोषण और बीमारियों से मुक्त करने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से 85 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग और 2,300 आभा आईडी का निर्माण इस बात का प्रतीक है कि सुकमा अब डिजिटल स्वास्थ्य और सुरक्षा कवच से लैस हो रहा है।
लाल आतंक के खात्मे के बाद सुकमा का यह बदलाव पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है। यह शिविर केवल एक चिकित्सकीय आयोजन नहीं था, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता के अटूट विश्वास का उत्सव था। 153 आयुष्मान कार्डों का मौके पर निर्माण यह सुनिश्चित करता है कि अब सुदूर अंचल का गरीब से गरीब व्यक्ति भी पैसे के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहेगा। सुकमा आज नक्सलवाद की पहचान को पीछे छोड़कर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है और हर कदम एक खुशहाल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
प्रेस विज्ञप्ति- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
प्रदेश की ग्राम पंचायतों में “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का व्यापक आयोजन
“मोर गांव - मोर पानी - मोर तरिया” अभियान बना जनभागीदारी का मॉडल
रायपुर – शासन के निर्देशानुसार आज दिनांक 07 अप्रैल 2026 को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में चावल महोत्सव के साथ “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का व्यापक एवं प्रभावी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पूर्व ही विभिन्न स्तरों पर लंबित प्रकरणों एवं समस्याओं का निराकरण कर योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया गया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित “मोर गांव - मोर पानी - मोर तरिया” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया – आय के जरिया” पहल ने जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया। युवाओं एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण हेतु नवा तरिया निर्माण के लिए स्थलों का चिन्हांकन किया गया तथा निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।
मनरेगा के तहत कार्यों में तेजी लाते हुए प्रगतिरत निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने तथा मांग आधारित नए कार्य प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही आजीविका डबरी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय वृद्धि हेतु Livelihood Layering गतिविधियों की रूपरेखा भी तैयार की गई।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) अंतर्गत स्वीकृत आवासों को अधिकतम 90 दिवस में पूर्ण करने के लक्ष्य के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई। हितग्राहियों को प्राप्त राशि की जानकारी देते हुए उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने एवं लंबित जियो-टैगिंग कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम में स्व-सहायता समूह की दीदियों की भूमिका को सशक्त करते हुए उन्हें सामग्री आपूर्ति एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया। नागरिक सूचना पटल पर समूह से जुड़े परिवारों की महिलाओं का नाम अंकित कर पारदर्शिता एवं सम्मान सुनिश्चित किया गया।
तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता को बढ़ावा देते हुए QR कोड के माध्यम से मनरेगा एवं PMAY-G कार्यों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई गई। अमृत सरोवरों एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर भी QR कोड आधारित सूचना उपलब्ध कराई जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई तथा स्लोगन, नारे एवं जिंगल के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया गया।
इस व्यापक आयोजन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जो ग्रामीण विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कोमालिका बारी से अंजलि मुंडा तक, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने भविष्य की प्रतिभाओं की मजबूत पाइपलाइन दिखाई
रायपुर-छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 ने देशभर के जनजातीय समुदायों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया, जहाँ अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कुछ के लिए यह बहु-खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का पहला अनुभव था, तो कुछ के लिए यह उनके उभरते हुए करियर का अगला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि पारंपरिक खेलों जैसे मल्लखंभ और कबड्डी को प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया।
भारत जहां 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है, ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने विविध जनजातीय पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने और विभिन्न खेलों में भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। ये खेल छत्तीसगढ़ के तीन शहरों—रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर—में आयोजित किए गए।
यहाँ कुछ ऐसे खिलाड़ियों की झलक प्रस्तुत है जो पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं, और कुछ ऐसे भी जिन्होंने भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन की संभावना दिखाई है।
मणिकांता एल (तैराक)
खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी के रूप में उभरे मणिकांता एल ने तैराकी प्रतियोगिता में आठ स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर कर्नाटक को समग्र चैंपियन बनने की मजबूत नींव दी। 21 वर्षीय मणिकांता पहले भी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं और आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी तैयारी के तहत उन्होंने कई स्पर्धाओं में भाग लिया।
200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक विशेषज्ञ मणिकांता ने अधिकांश रेस में अपना दबदबा कायम रखा। उनका मानना है कि यहां का प्रदर्शन उन्हें एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन के लिए और अधिक फोकस के साथ तैयारी करने का आत्मविश्वास देगा।
अंजलि मुंडा (तैराक)
ओडिशा के जाजपुर जिले की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा तैराकी प्रतियोगिता की सबसे चमकदार उभरती सितारों में से एक रहीं। उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले, 100 मीटर बैकस्ट्रोक, 50 मीटर बैकस्ट्रोक और 4x100 मेडले में कुल पांच स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि अपने से कहीं अधिक उम्र के खिलाड़ियों को पछाड़ने की क्षमता भी दिखाई।
कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की छात्रा अंजलि अपने पहले खेलो इंडिया गेम्स में हिस्सा ले रही थीं, लेकिन प्रतियोगिता के बड़े मंच के बावजूद वह बिल्कुल भी दबाव में नहीं दिखीं। उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने की पूरी क्षमता नजर आती है।
कोमालिका बारी (तीरंदाज)
दीपिका कुमारी के बाद विश्व कैडेट और विश्व यूथ चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय कोमालिका बारी 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की प्रबल दावेदारों में से एक हैं। वह पुणे में चयन ट्रायल की तैयारी कर रही थीं और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में प्रतिस्पर्धा के स्तर को देखते हुए उन्हें लगा कि यहां भाग लेना उनके लिए मूल्यवान मैच प्रैक्टिस साबित होगा।
और उनका यह निर्णय सही साबित हुआ। हालांकि वह व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम रिकर्व में स्वर्ण पदक जीतकर लौटीं, लेकिन झारखंड की इस तीरंदाज को हर मुकाबले में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। महिला टीम स्पर्धा में उन्हें फाइनल में नागालैंड से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
किरण पिस्दा (फुटबॉल)
छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल टीम की कप्तान किरण पिस्दा ने सामने से नेतृत्व किया और सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के दौरान गोलकीपर के रूप में दस्ताने पहनकर अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। किरण न सिर्फ अपनी टीम की सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं, बल्कि उन्होंने युवा टीम का शानदार नेतृत्व करते हुए यह भी दिखाया कि बेहतरीन नेतृत्व कैसे किसी टीम को बदल सकता है।
किरण पहले ही सैफ प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और क्रोएशियाई लीग में भी खेल चुकी हैं। 24 वर्षीय यह खिलाड़ी अब भारतीय राष्ट्रीय टीम में नियमित स्थान बनाने की उम्मीद कर रही हैं, क्योंकि वह किसी भी पोजीशन पर खेलने में सक्षम हैं।
बाबूलाल हेम्ब्रम (वेटलिफ्टर)
झारखंड के 19 वर्षीय बाबूलाल हेम्ब्रम 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले अपने राज्य के पहले वेटलिफ्टर बने थे। वह अपने राज्य के पहले ऐसे अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर भी हैं जिन्होंने IWF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप और एशियन यूथ चैंपियनशिप में पदक जीता है।
रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के रहने वाले बाबूलाल अब जूनियर से सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और साई पटियाला के नेशनल कैंप में प्रशिक्षण ले रहे हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता गया रजत पदक उन्हें अब सीनियर खिलाड़ियों को चुनौती देने का आत्मविश्वास देता है।
शिव कुमार सोरेन (स्प्रिंटर)
झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में आसानी से स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 100 मीटर में 10.58 सेकंड और 200 मीटर में 21.51 सेकंड का समय दर्ज किया। बोकारो के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रशिक्षु शिव का मजबूत शारीरिक गठन है और उनमें भविष्य में और तेज दौड़ने की क्षमता दिखाई देती है।
झिल्ली दलाबेहरा (ओडिशा)
ओडिशा की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक झिल्ली दलाबेहरा ने 2020 एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 45 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक और 2021 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। भारतीय रेलवे की कर्मचारी झिल्ली ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 53 किलोग्राम वर्ग में भाग लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भार्गवी भगोरा (तीरंदाज)
गुजरात की 21 वर्षीय भार्गवी भगोरा ने रायपुर में रिकर्व व्यक्तिगत फाइनल में कोमालिका बारी से हार का सामना किया, लेकिन जिस तरह उन्होंने अधिक अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को अंत तक कड़ी टक्कर दी, उससे उन्हें जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम के चयन ट्रायल से पहले काफी आत्मविश्वास मिलेगा।
अरावली जिले से आने वाली भार्गवी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के विभिन्न संस्करणों में तीन पदक जीत चुकी हैं और वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा समर्थित नडियाद हाई परफॉर्मेंस सेंटर में प्रशिक्षण ले रही हैं।
Chhattisgarh is Inspired by Ideals of Lord Shri Ram: Chief Minister Shri Sai Presents Bell Metal Artefact ‘Mata Kaushalya Ke Ram’ to Prime Minister Shri Narendra Modi
Raipur-Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, during his meeting with Prime Minister Shri Narendra Modi in New Delhi, presented a unique bell metal artefact titled ‘Mata Kaushalya ke Ram’, symbolising the rich tribal traditions and cultural identity of Chhattisgarh.
On the occasion, Chief Minister Shri Sai remarked that Chhattisgarh is the sacred land associated with the maternal home i.e. "Nanihaal" of Lord Shri Ram. Land of Chhattisgarh shares a deep spiritual connection with Lord Shri Ram. He noted that the artefact embodies the state’s faith, traditions, and creative excellence, while reflecting the vibrant cultural heritage and exceptional craftsmanship of its tribal communities.
Chief Minister Shri Sai further stated that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, the construction of the grand temple of Lord Shri Ram in Ayodhya stands as a symbol of the resurgence of India’s cultural consciousness. He highlighted that through ‘Shri Ramlala Darshan Yojana’ of Chhattisgarh Government, thousands of devotees from the state are undertaking pilgrimages to Ayodhya Dham, thereby strengthening the spiritual bond among people.
Emphasising the guiding principles of Lord Shri Ram, Chief Minister Shri Sai said that the state government is steadily advancing on the path of service, values, and good governance. He expressed confidence that under the guidance of Prime Minister Shri Narendra Modi, Chhattisgarh will continue to set new benchmarks in development and public welfare.