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शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से संवरा जीवन, पीएम आवास, उज्ज्वला और महतारी वंदन से मिला संबल
रायपुर-शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में न केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि आमजन के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय भी जोड़ रही हैं। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड पामगढ़ के ग्राम लोहर्सी की निवासी श्रीमती ज्योति कश्यप की जीवन यात्रा परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है।
कभी अभाव और कठिनाइयों से जूझ रही श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन आज शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पूरी तरह बदल चुका है। पूर्व में उनका कच्चा मकान हर मौसम में चुनौती बन जाता था। वर्षा के दौरान छत टपकना, घर में पानी भरना और असुरक्षित वातावरण में रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसके साथ ही लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते समय उठने वाले धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उनके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही थीं।
परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आशा और विश्वास के साथ आवेदन किया और आवास स्वीकृत होने के बाद उनके जीवन में जैसे नई रोशनी का संचार हुआ। पक्के मकान के निर्माण से अब उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में निवास कर रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त होने से उनकी रसोई धुएं से मुक्त हो गई है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ समय और श्रम की भी बचत हो रही है।
श्रीमती ज्योति कश्यप के जीवन में आत्मनिर्भरता का एक नया आयाम महतारी वंदन योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत प्रतिमाह प्राप्त होने वाली 1000 रुपये की सहायता राशि से वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर पा रही हैं। जहां पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। आज श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं यदि सही पात्र तक पहुंचें, तो वे न केवल जीवन स्तर को सुधारती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान को भी नई ऊंचाई प्रदान करती हैं।
आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं, गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य
रायपुर-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सामाजिक पहचान भी प्रदान कर रही है।
रायगढ़ जिले के ग्राम बड़ेभंडार की निवासी श्रीमती मथुरा कुर्रे इसकी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें रिवॉल्विंग फंड एवं कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने घर पर ही अचार, पापड़, बड़ी एवं मसाला निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज वे अपने उत्पादों का बाजार में विक्रय कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।
इसी क्रम में ग्राम रूमकेरा, तहसील घरघोड़ा की श्रीमती जमुना सिदार की कहानी भी प्रेरणादायक है। पूर्व में वे एक गृहिणी थीं, किन्तु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने टोकरी, सूपा एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। उन्हें विभिन्न मेलों, विशेषकर ‘सरस मेला’ में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मगौरव का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जिले में अनेक महिलाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं।
शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सशक्त भूमिका भी निभा रही हैं।
बिहान योजना आज जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
एक जिला एक उत्पाद योजना से बदली तस्वीर, अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा कमाया
रायपुर-सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।
पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
किसानों को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आकाश चंद्राकर को लगभग 49 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि संसाधन जुटाने, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं तकनीकों का उपयोग करने में सहायता मिली, जिसका सीधा लाभ उत्पादन और गुणवत्ता में दिखाई दिया।
आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए समृद्धि का नया द्वार बनकर आई है। शासन से प्राप्त अनुदान ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
“एक जिला एक उत्पाद” के अंतर्गत अदरक को चयनित किए जाने के बाद जिले के अन्य किसान भी इस नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में अदरक से प्राप्त अधिक शुद्ध लाभ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। जिला प्रशासन बालोद और उद्यानिकी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सलाह एवं अनुदान से खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का माध्यम बनती जा रही है।
श्री चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन की इस पहल से बालोद जिला अदरक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।
संघर्ष और भटकाव के बाद मनकू कड़ती की नई शुरुआत
रायपुर-छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है।
बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना ने मनकू के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उनका बचपन अभाव और अस्थिरता के माहौल में बीता।
इन्हीं परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के प्रभाव में मनकू धीरे-धीरे भटकाव की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि गलत रास्ता ही उन्हें पहचान और सुरक्षा दिला सकता है। हालांकि, उनके भीतर एक द्वंद्व लगातार बना रहा। क्या यही उनका भविष्य है ? यह सवाल उनके मन में बार-बार उठता रहा। समय के साथ मनकू के भीतर आत्मचिंतन की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय के रास्ते पर चलकर वे अपने जीवन को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं। यही एहसास उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपनी दिशा बदलेंगे और एक नई शुरुआत करेंगे।
अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही फैसला साबित हुआ। इस कदम ने उनके लिए मुख्यधारा में लौटने और एक सम्मानजनक जीवन जीने के रास्ते खोल दिए। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने न केवल भारी मशीनों का संचालन सीखा, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी अपने जीवन में अपनाया। निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया।
आज मनकू कड़ती एक बदले हुए इंसान के रूप में सामने आए हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं और समाज के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां पहले उनके जीवन में डर और अस्थिरता थी, वहीं अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद ने जगह ले ली है। मनकू कड़ती के जीवन की यह नई शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों और गलत दिशा में बढ़ते कदमों के बावजूद, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।