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Sunday, 12 April 2026

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CBSE ने 130 अध्यापकों के खिलाफ की सख्त कार्रवाई, कापियों के मूल्यांकन में लापरवाही की गयी थी...

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों की गणना सहीं से न करने पर देशभर के 130 अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. इसके तहत सीबीएसई ने देशभर में 130 अध्यापकों और को-ऑरिडेटर्स पर कार्रवाई करने के लिए स्कूलों को नोटिस भेज दिया. जिसमें अध्यापकों को निलंबित करना भी शामिल है. बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक़ जहाँ-जहाँ भी कापियों के मूल्यांकन में गलतियाँ पाई गई हैं वहां के क्षेत्रीय कार्यालयों को उन स्कूलों, टीचर्स और को-आर्डिनेटर्स के खिलाफ कार्यवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

सबसे अधिक गड़बड़ी पटना में
सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सबसे अधिक गलतियाँ पटना के अध्यापकों के द्वारा की गई हैं. यहाँ के 45 शिक्षक बोर्ड की साख को खराब करने और छात्रों की करियर से जुड़े गंभीर नतीजों के साथ खिलवाड़ करते पाए गए.

अन्य क्षेत्र जहाँ पाई गई गलतियाँ
पटना के अलावा सीबीएसई के देहरादून ऑफिस के 27, चेन्नई के 14, इलाहाबाद के 11, भुवनेश्वर के 7, , गुवाहाटी के 2, अजमेर के 8, तिरुवंतपुरम के 1 और दिल्ली के 6 अध्यापकों को मूल्यांकन में गलतियों के लिए चिह्नित किया गया है.

दिल्ली रीजन के तो 7 अध्यापकों को निलंबित किया जाएगा. इन्हें अंकों की सही गणना न करने का दोषी पाया गया है. कार्रवाई करते हुए दिल्ली क्षेत्र में तीन सरकारी और 2 निजी स्कूलों के शिक्षकों को अब तक सस्पेंड कर दिया गया है. इसी तरह बोर्ड ने इलाहाबाद के कुछ स्कूलों को नोटिस भेजकर 15 अध्यापकों को निलंबित करने को कहा है. अधिकारी ने बताया कि देहरादून ऑफिस से 27 चिन्हित अध्यापकों के खिलाफ बर्खास्त करने समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई के नोटिस स्कूलों को भेजे जा चुके है.

50 से 55 अंक तक पाई गई गड़बड़ी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शिक्षकों के खिलाफ यह सख्त कदम तब उठाया है जब कापियों की दोबारा जांच की गई तो उनमें 50- 55 अंकों की गड़बड़ी पाई गई. उर्दू की एक कापी में छत्र को फेल कर दिया गया था. जब उस कापी का पुनर्मूल्यांकन करवाया गया तो वह छात्र पास हो गया.

पहली बार सीबीएसई ने की ऐसी कार्रवाई
ऐसा पहली बार हो रहा है जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने इस तरह की गलती करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कठोर कदम उठाया है.

छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
कापियों के मूल्यांकन में अध्यापकों द्वारा की जाने वाली यह गड़बड़ी निश्चित तौर पर यह उनके द्वारा की जाने वाली घोर लापरवाही है. कक्षा 12 की परीक्षा के नतीजे छात्रों के करियर के लिए बहुच अहम होते हैं. इंटरमीडिएट के मार्क्स के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन होते हैं.

कैसे पता चला मूल्यांकन में गड़बड़ी
सीबीएसई ने 10 वीं और 12 वीं नतीजे मई में घोषित किए थे. उसके बाद पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हुई. इस प्रक्रिया के तहत वे छात्र जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था. जिसमें बोर्ड ने 50 से लेकर 55 अंकों तक की गड़बड़ी पाई.

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प्रधानमंत्री ने यहां पर ‘संत कबीर अकादमी‘ की आधारशिला रखी. साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे.....

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मगहर,उप्र.  संत कबीर दास का 620वां प्राकट्य दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी आज उत्तरप्रदेश के मगहर पहुंचे, ये वही स्थान है जहां कबीर दास जी की समाधि है. प्रधानमंत्री ने यहां पर ‘संत कबीर अकादमी‘ की आधारशिला रखी. प्रधानमंत्री के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. इसके बाद पीएम मोदी ने यहां जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कबीर की महिमा का बखान करते हुए कांग्रेस-सपा और बसपा पर तीखे हमले भी किए.

प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन के दौरान बीच बीच में कबीर के दोहों के माध्यम से उनकी महिमा बताई. प्रधानमंत्री ने कहा भारत को महान संतों का जन्म स्थली होने का गौरव है.यहां हर क्षेत्र में ऐसे महान संत हुए जिसके बदौलत हमारा देश कई सालों तक गुलाम रहने के बाद भी इसके मूल स्वभाव में बदलाव नहीं आया. प्रधानमंत्री ने कहा ये हमारे देश की महान धरती का तप है, उसकी पुण्यता है कि समय के साथ, समाज में आने वाली आंतरिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए समय-समय पर ऋषियों, मुनियों, संतों का मार्गदर्शन मिला.
 अपने संबोधन के दौरान मोदी ने कबीर के इस दोहे को प्रमुखता याद किया-

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान विरोधी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल बस कलह और राजनीति चाहते हैं, ये दल समाजवाद और बहुजन वाद के नाम पर ढोंग कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने लिए करोड़ों के बंगले बनवाए हैं, ऐसे लोगों से यूपी के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है.मोदी ने कहा कुछ दलों को शांति और विकास नहीं, कलह और अशांति चाहिए. उनको लगता है जितना असंतोष और अशांति का वातावरण बनाएंगे उतना राजनीतिक लाभ होगा. सच्चाई ये है ऐसे लोग जमीन से कट चुके हैं. इन्हें अंदाजा नहीं कि संत कबीर, महात्मा गांधी, बाबा साहेब को मानने वाले हमारे देश का स्वभाव क्या है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 14-15 वर्ष पहले जब पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी यहां आए थे, तब उन्होंने इस जगह के लिए एक सपना देखा था. उनके सपने को साकार करने के लिए मगहर को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में सद्भाव-समरसता के मुख्य केंद्र के तौर पर विकसित करने का काम अब किया जा रहा है.

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ज्यादा नहीं बढ़ेगी दवाओं की कीमत, नीति आयोग ने की ऐसी व्यवस्था.....

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वर्तमान में सरकार सीधे तौर पर 850 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है।

नई दिल्ली। सरकार ने दवाओं की कीमत कम करने और जरूरी दवाओं को आम लोगों की पहुंच में लाने के लिए नई नीति बनाई है। दवाओं की खुदरा कीमतों को कम रखने के लिए सरकार निर्माता के स्तर पर आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का फैसला किया है। इसी स्तर पर दवाओं की कीमत कम होने से स्टॉकिस्ट, थोक व्यापारी, वितरक या अस्पताल तक दवाएं पहुंचने पर उनकी कीमत नहीं बढ़ेगी। इसके अलावा डॉक्टरों, अस्पतालों और वितरकों द्वारा दूसरों ब्रांड की दवाओं की सिफारिश करने पर उनके लाभ में कटौती करने का कदम भी उठाया जा रहा है। वर्तमान में सभी आवश्यक दवाओं के मूल्य खुदरा विक्रेता स्तर पर नियंत्रित होती हैं, जिनकी बाजार में हिस्सेदारी एक फीसद से भी कम है। वहीं, रिटेलर का मार्जिन एमआरपी तक पहुंचते पहुंचते 16 फीसद तक हो जाता है। इसका सीधा असर स्टॉकिस्ट, थोक व्यापारी, अस्पताल तक पड़ता है। जिसका खर्च आखिरकार मरीज के परिजनों को उठाना पड़ता है।

नीति आयोग के द्वारा प्रस्तावित नए नियम के अनुसार, दवा निर्माता के यहां से दवाएं निकलने के बाद एमआरपी का 24 फीसद फिक्स ट्रेड मार्जिन ही दिया जाएगा। इससे दवाओं पर होने वाली जबरदस्त मुनाफाखोरी पर लगाम लगेगी। साथ ही सप्लाई-चेन के आधार पर कस्टमर को डिस्काउंट मिलेगा। बताते चलें कि वर्तमान में सरकार सीधे तौर पर 850 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। नई प्रणाली के तहत एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के घरेलू दवा बाजार का लगभग 17 फीसद सीधे तौर पर सरकारी मूल्य नियंत्रण में आ जाएगा। इस प्रकार उपभोक्ताओं की चिकित्सा लागत कम हो जाएगी।

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