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मौसम विभाग : हिमाचल और उत्तराखंड समेत 8 राज्यों में, 48 घंटे में 70 किमी की रफ्तार से तूफान की चेतावनी.....
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::fulltext::- मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान में पारा 47-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है
- 117 साल में देश में अधिकतम तापमान 1.18 और न्यूनतम 1.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है
नई दिल्ली.देश का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यह बात 1901 से अब तक 118 साल के तापमान के अध्ययन में सामने आई है। इसमें भारत के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही 15 साल में गर्मी के 9 सीजन में औसत तापमान 31 डिग्री से ज्यादा रहा। जानकारों ने बताया कि 2014, 15 और 16 के बाद 2017 चौथा सबसे गर्म सीजन रहा है। 2018 भी लगातार 5वां सबसे गर्म सीजन रहेगा, ऐसा 117 साल में पहली बार होगा। दूसरी ओर, मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो उत्तर भारत में आए आंधी-तूफान और दक्षिण भारत में बढ़ते तापमान की वजह से इस बार मानसून 4-5 दिन पहले 25 मई को केरल में दस्तक दे सकता है। बारिश भी अच्छी होगी। उधर, मौसम विभाग ने रविवार के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत 8 राज्यों में तूफान की चेतावनी जारी की है। राजस्थान में भी बवंडर उठ सकता है।
गर्म सीजन में गर्मी और ठंड में सर्दी बढ़ रही है
- 20वीं सदी से तापमान बढ़ रहा है। 2001 से 2016 के बीच न्यूनतम और उच्चतम तापमान में लगातार तेजी देखी गई है। 1901 से न्यूनतम और उच्चतम तापमान क्रमश: 1.07 और 1.18 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है।
- 2001-17 के बीच सर्दी के सीजन में औसत तापमान 15 डिग्री रहा। 2009 में सर्दी का सीजन सबसे गर्म रहा। इस सीजन में तापमान 16.25 डिग्री सेल्सियस रहा। यानी गर्मी में गर्मी और ठंड में सर्दी बढ़ रही है।
17 राज्यों में पारा सामान्य से 1.6 से 5.1 डिग्री तक ज्यादा
- जम्मू कश्मीर, हिमाचल में पारा सामान्य से 3 से 5.1 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया। विदर्भ, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान में पारा सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री ज्यादा रहा।
- राजस्थान, एमपी, विदर्भ, छत्तीसगढ़, दिल्ली और गुजरात के ज्यादातर हिस्सों में पारा 40 डिग्री से ज्यादा रहा।
चेतावनी- राजस्थान में कुछ दिनों में पारा 47 से 50 डिग्री जा सकता है
- मौसम विभाग के वैज्ञानिक चेतन शर्मा ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि राजस्थान में पारा 47-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मई और जून में राजधानी जयपुर में पारा 45 डिग्री के आसपास रहने की आशंका है। बीकानेर, चुरू सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे।
भारत में इतनी गर्मी क्यों?
- दुनिया के अन्य महासागरों के मुकाबले प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने के कारण भारत के तटीय क्षेत्रों के वातावरण में नमी लगातार घट रही है। नमी घटने के कारण सूखी हवाएं चल रही हैं, जो तापमान बढ़ने के बाद लू में बदल रही हैं।
2050 तक भारत जैसे गर्म देशों में गेहूं उत्पादन 25% तक घट सकता है
- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल वॉर्मिंग से देश में गेहूं उत्पादन 2050 तक 25% घट सकता है। जबकि अमेरिका, यूरोप जैसे ठंडे इलाकों में 25% बढ़ने का अनुमान है।
- देश में 1970 से 2010 के बीच खरीफ सीजन में पारा 0.45 डिग्री और रबी सीजन में 0.63 डिग्री बढ़ा है। इस दौरान औसत सालाना बारिश 86 मिमी. कम हुई है।
1970 से 2016 तक लू के सबसे ज्यादा मामले में महाराष्ट्र में
| महाराष्ट्र |
87 |
| राजस्थान |
81 |
| प. बंगाल |
77 |
| ओडिशा |
67 |
| लू से 1970-74 के बीच 2029 मौतें हुई। जबकि, 2015 में ही अकेले 2081 मौतें हुई थीं। |
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देश के 8 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट
- पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के असर से उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में आंधी-तूफान का खतरा बना हुआ है। पंजाब के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। उत्तर भारत के कई मैदानी राज्यों में रविवार को इसका असर रहेगा। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में 8 राज्यों में 70 किमी की रफ्तार से तूफान की चेतावनी जारी की है।
- इसके साथ ही राजस्थान में कुछ जगहों पर रविवार और सोमवार को धूल बवंडर उठ सकता है। मंगलवार को मौसम फिर से पूरी तरह साफ हो जाएगा, साथ ही पारा भी बढ़ेगा।
- बता दें कि मई के पहले हफ्ते में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आंधी-तूफान के चलते 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
कहीं आंधी-तूफान, कहीं प्री-मानसून बारिश
- देश में पिछले 15 दिन से मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। शनिवार को पंजाब, जम्मू-कश्मीर में धूलभरी आंधी के साथ तूफान आया। वहीं, देश के 17 राज्यों के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री से ज्यादा रहा। यहां दिनभर लोग लू से परेशान होते रहे। वहीं, अरुणाचल, झारखंड, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक में प्री-मानसून बारिश भी हुई।
आंधी तूफान के असर से 5 दिन पहले आ सकता है मानसून
- मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर भारत में आए आंधी-तूफान और दक्षिण भारत में बढ़ते तापमान की वजह से इस बार मानसून 4-5 दिन पहले दस्तक दे सकता है। बारिश भी अच्छी होगी। आंधी-तूफान के कारण मानसून कम-ज्यादा नहीं होगा, बल्कि इसके समय में बदलाव हो सकता है।
- एग्रोमीट्रियोलॉजिस्ट डॉ. रामचंद्र साबले ने भास्कर को बताया कि डस्ट स्टॉर्म (धूल भरी आंधी) हर साल होने वाली प्रक्रिया है। यह एक प्री मानसून एक्टिविटी है। इस साल अरब सागर से आने वाली गर्म हवा राजस्थान से पूर्व की ओर तेज रफ्तार से बहने लगी, उसी समय उत्तर-पश्चिम में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस मौजूद होने से आंधी तूफान का असर बढ़ गया।
- इसी दौरान उत्तर भारत में हवा का दाब 1000 से 1002 हेप्टा पास्कल (हवा के दाब की यूनिट) रहा, इस वजह से चक्रवात को बढ़ावा मिला। दक्षिण भारत में भी लू जैसी स्थिति हो गई। इसका मतलब है की मानसून इस साल भारत में जल्द दस्तक देने की तैयारी में है। ऐसे ही हालात रहे तो मानसून 25 मई को केरल में पहुंच सकता है। आमतौर पर केरल में 1 जून तक मानसून आता है।
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