——
Monday, 13 April 2026

All Categories

1863::/cck::

अगर आपके पर्स में भी हैं यह 7 चीजें तो तुरंत बाहर निकालें.....

 

::/introtext::
::fulltext::
अक्सर हमारा कई बेकार की सामग्री से भरा रहता है। आलस के कारण हम उसे साफ भी नहीं करते लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आलस और गलती ही आपकी परेशानी का कारण है। जी हां,
पर्स में रखी कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो के आगमन को रोकती हैं। अगर आपके पर्स में भी रखी हैं यह 7 चीजें तो इन्हें फौरन निकाल बाहर करें।
 
पुराने और कटे-फटे नोट:
हाल ही में नोटबंदी की वजह से पुराने नोट अब प्रचलन में नहीं है। क्यों ना आप भी पुराने नोटों को अपने पर्स से बाहर का रास्ता दिखाएं। कटे-फटे घिसे हुए पुराने नोट मन:स्थिति को बेचैन करते हैं। सोच में नकारात्मकता लाते हैं, इन्हें तुरंत हटाएं।
 
पुराने बिल :
यह भी वास्तविकता है कि आप पुराने बिलों को अत्यधिक संभालने के चक्कर में पर्स में ही रखना पसंद करते हैं लेकिन वह वृत्ति धन के आगमन को रोकती है। पुराने बिलों को सम्भाल कर अलमारी या अन्य सुरक्षित स्थान पर रखें।
 
दिवंगत परिजन की तस्वीर :

घर में किसी का देहांत हो जाए तो उनकी तस्वीरों से हमारा भावनात्मक जुड़ा़व हो जाता है लेकिन यह आदत हमारे धन के प्रबल योग को भी कमजोर करती है। शुभता की दृष्टि से भी यह उचित नहीं है। अपने निकटतम की स्मृतियों को घर में और यादों में सहेजे पर्स में नहीं।
 
उधारी का हिसाब :
हमने
जिनसे उधार लिया है और जिन्होंने हमसे उधार लिया है यह दोनों ही हिसाब किसी डायरी में लिखकर घर में ही रखें। पर्स में रखने से धन की आमद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
 
इष्टदेव की तस्वीर :
हमारी श्रद्धा के अनुसार हम देवी-देवताओं की तस्वीर को पर्स में रखते हैं लेकिन यह वृत्ति उचित नहीं है। तस्वीर के बजाय आप उनके यंत्र पर्स में रख सकते हैं।
 
ब्लेड-चाकू या अन्य तीखी-नुकीली सामग्री :
अक्सर कुछ लोग अपनी सुरक्षा और हिफाजत के लिए ब्लेड-चाकू या अन्य नुकीली सामग्री रखते हैं लेकिन इन्हें रखने से नकरात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई बार अनजाने में यही चीजें स्वयं के लिए खतरनाक साबित हो जाती हैं। धन के लिए तो यह शत्रु सामग्री है। अगर सुरक्षा के लिए इन्हें रखना जरूरी है तो पर्स के गोपनीय जेब में रखें।
 
फालतु कागज़ात:

जो भी अनुपयोगी सामग्री है, बेकार है, काम की नहीं है उन्हें जितनी जल्दी हो सके बाहर का रास्ता दिखाएं क्योंकि पर्स में पुराने पड़े कागज़ात और बेकार सामग्री को रखने से धन नहीं ठहरता और मां लक्ष्मी को भी ऐसा सामान पसंद नहीं है।
 
::/fulltext::

1842::/cck::

क्या आपको मालूम है भगवान शिव की थी एक बहन?.....


::/introtext::
::fulltext::

हमने अपने कई लेखों के माध्यम से भगवान शिव और देवी पार्वती से जुड़ी कई रोचक बातें आपके सामने प्रस्तुत की है। आज हम आपको ऐसी ही एक और रोमांचित कर देने वाली घटना के बारे में बताएंगे। जी हाँ, आपने भगवान शिव की संतानों और उनकी पत्नियों के बारे में तो पढ़ा ही होगा किंतु महादेव की बहन के बारे में शायद ही आपने सुना हो। तो चलिए जानते हैं क्या है भोलेनाथ की इस बहन की कहानी।

देवी पार्वती रहती थी गुमसुम

जैसा कि हम सब जानते हैं कि देवी पार्वती ने महादेव से विवाह करने के लिए सभी सुखों और सुविधाओं का त्याग कर दिया था। भोलेनाथ से विवाह के पश्चात देवी पार्वती उनके साथ कैलाश पर आकर रहने लगी थीं। यूँ तो माता बहुत प्रसन्न थी किन्तु उन्हें वहां बहुत ही अकेलापन महसूस होता था चूँकि शिव जी ज़्यादातर समय अपने ध्यान में ही लीन रहते थे इसलिए माता के साथ कोई बातचीत करने के लिए वहां मौजूद नहीं था। वे हमेशा सोचती कि यदि उनकी कोई ननंद होती तो वे दोनों खूब गप्पे लड़ाते और उनका समय भी आसानी से व्यतीत हो जाता लेकिन वे इस बात से भली भांति परिचित थीं कि शिव जी अजन्मे हैं इसलिए उनका कोई भाई या बहन नहीं हो सकता। यही सोचकर वे अपने दिल की बात अपने पति से नहीं कह पा रही थीं।

शिव जी ने पढ़ ली उनके मन की बात

भले ही माता पार्वती अपने दिल की बात महादेव से न कह पा रही हों लेकिन भगवान तो अन्तर्यामी हैं उन्होंने फौरन ही सब कुछ जान लिया। तब शिव जी ने देवी पार्वती से उनकी परेशानी का कारण पूछा। माता से रहा न गया और उन्होंने महादेव को सारी बात बतायी। देवी शिव जी से बोलीं कि सभी स्त्रियों की ननंद होती है यदि उनकी भी कोई ननंद होती तो कैलाश पर उनका भी मन लगा रहता। यह सुनकर भोलेनाथ मुस्कुराए और उन्होंने देवी से पूछा कि क्या उनकी ननंद से बन पाएगी। इस पर पार्वती जी बोलीं क्यों नहीं, ननंद भी तो सखी के समान होती है।

भोलेनाथ की माया से उत्पन्न हुई असावरी देवी

देवी पार्वती की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान शिव ने अपनी माया से एक देवी उत्पन्न की जिन्हें असावरी के नाम से जाना जाता है। यह थीं भोलेनाथ की बहन और देवी पार्वती की ननंद। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला कि असावरी देवी उनकी ननद है तो वे बहुत प्रसन्न हुईं।

ऐसी थीं असावरी देवी

भोलेनाथ की माया से उप्तन्न हुई उनकी यह बहन काफी मोटी थी और उनके पैरों में बड़ी बड़ी दरारें थी, फिर भी ननद के आने से देवी पार्वती बेहद खुश थीं और उनकी सेवा सत्कार में लग गयीं। असावरी देवी स्नान करने गईं तब पार्वती जी उनके लिए खाना बनाने लगीं। जब वे स्नान करके लौटीं तो सारा भोजन चट कर गयीं, इतना ही नहीं उन्होंने पार्वती जी का पूरा का पूरा भोजन भण्डार ही खाली कर डाला और भोलेनाथ के भोजन के लिए कुछ भी नहीं बचा। यह देख पार्वती जी बहुत दुखी हुईं। अब असावरी देवी ने अपनी भाभी से वस्त्र मांगे किंतु पार्वती जी के दिए हुए वस्त्र उन्हें छोटे पड़ गए तब पार्वती जी उनके लिए दूसरे वस्त्रों के इंतज़ाम में लग गयी।

जब असावरी देवी ने पार्वती जी को छिपा लिया

एक दिन असावरी देवी को मज़ाक सूझा और उन्होंने पार्वती जी को अपने पैरों की दरारों में छिपा लिया। तभी भोलेनाथ पार्वती जी को ढूंढते हुए असावरी देवी के पास पहुंचे और उनसे पूछने लगे कि उन्होंने पार्वती जी को देखा, इस पर उन्होंने भोलेनाथ से झूठ कह दिया कि उन्हें इस बारे में नहीं पता। तब शिव जी असावरी देवी से बोले कि कहीं यह उनकी कोई शरारत तो नहीं किन्तु असावरी देवी साफ़ मुकर गयीं। उसके बाद जैसे ही उन्होंने अपना पैर ज़मीन पर पटका देवी पार्वती उसमें से निकल कर बाहर गिर गयी।

क्रोधित हो गयी पार्वती जी

असावरी देवी की इस हरकत से देवी पार्वती बहुत क्रोधित हो उठी और शिव जी से कहा कि उनसे बड़ी भूल हो गई कि उन्होंने एक ननंद की इच्छा की। पार्वती जी ने शिव जी से आग्रह किया कि वे फ़ौरन असावरी देवी को ससुराल भेज दें। तब महादेव ने अपनी बहन को हमेशा के लिए कैलाश से विदा कर दिया।


::/fulltext::

1827::/cck::

गोमती चक्र के यह 5 टोटके आपको हिला कर रख देंगे,शुभता के लिए अवश्य आजमाएं.....

::/introtext::
::fulltext::

का नाम हम सबने सुना है। तंत्र शास्त्र से लेकर वास्तु शास्त्र तक सभी ने इसके विशेष फायदे बताए हैं। आइए जानते हैं, गोमती चक्र के यह 5 चमत्कारी टोटके जो आपके जीवन की दिशा बदल देंगे।  गोमती चक्र गोमती नदी में पाए जाने वाले अल्पमोली कैल्शियम मिश्रित पत्थर होते हैं। इनके एक तरफ उठी हुई सतह होती है, और दूसरी तरफ चक्र होता है। इन चक्रों को विष्णु-लक्ष्मी जी का प्रतीक माना जाता है।

1- यदि किसी व्यक्ति या बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है, तो वह किसी निर्जन स्थान पर जाकर 3 गोमती चक्रों को अपने उपर से 7 बार उतार कर अपने पीछे फेंक दें और पीछे मुड़कर न देंखे। इस क्रिया को करने से कभी नजर दोष नहीं होगा।
 
2- यदि आपको निरन्तर आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है, तो प्रथम सोमवार को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों का हल्दी से तिलक करें और शंकर जी का ध्यान कर पीले कपड़ें में बांधकर पूरे घर में घुमाकर किसी बहते हुये जल में प्रवाहित करें। इसे करने से कुछ समय पश्चात ही लाभ मिलेगा।
 
3- यदि कोई बच्चा शीघ्र ही डर जाता है, तो प्रथम मंगलवार को अभिमंत्रित गोमती चक्र पर हनुमान जी के दाएं कन्धे का सिन्दूर लेकर तिलक कर किसी लाल कपड़े में बांधकर बच्चे के गले में पहना दें। बच्चे का डरना समाप्त होगा।
 
4- यदि आपके व्यवसाय में किसी की नजर लग जाती है, तो 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र और तीन छोटे नारियल को पूजा करने के बाद पीले वस्त्र में बांधकर मुख्यद्वार पर लटका दें। इसके बाद आपके व्यवसाय को कभी नजर नहीं लगेगी।
 
5- यदि आपके हाथों से खर्च अधिक होता है, तो प्रथम शुक्रवार को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को पीले कपड़े पर रखकर मां लक्ष्मी का स्मरण कर विधिवत पूजन करें। दूसरे दिन उनमें से 4 गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एक-2 दबा दें और 3 गोमती चक्र को लाल चस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें तथा 3 चक्रों को पूजा स्थल में रख्र दें। शेष बचें एक चक्र को किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ भगवान को अर्पित कर दें। यह प्रयोग करने से कुछ समय में लाभ दिखने लगेगा।
::/fulltext::

1821::/cck::

विवाह के प्रकार और हिंदू धर्मानुसार कौन से विवाह को मिली है मान्यता....

::/introtext::
::fulltext::
शास्त्रों के अनुसार आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, आर्श, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच। उक्त आठ विवाह में से ब्रह्म विवाह को ही मान्यता दी गई है बाकि विवाह को धर्म के सम्मत नहीं माना गया है। हालांकि इसमें देव विवाह को भी प्राचीन काल में मान्यता प्राप्त थी। प्राजापत्य, असुर, गंधर्व, राक्षस और को बेहद अशुभ माना जाता है।  हिन्दू विवाह भोगलिप्सा का साधन नहीं, एक धार्मिक-संस्कार है। संस्कार से अंतःशुद्धि होती है और शुद्ध अंतःकरण में ही दांपत्य जीवन सुखमय व्यतीत हो पाता है। 16 संस्कारों में ब्रह्म विवाह को ही शामिल किया गया है।

1.ब्रह्म विवाह : दोनों पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या की इच्‍छा‍नुसार विवाह निश्चित कर देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। इस विवाह में वैदिक रीति और नियम का पालन किया जाता है। यही है।
 
2.देव विवाह : किसी सेवा धार्मिक कार्य या उद्येश्य के हेतु या मूल्य के रूप में अपनी कन्या को किसी विशेष वर को दे देना 'दैव विवाह' कहलाता है। लेकिन इसमें कन्या की इच्छा की अनदेखी नहीं की जा सकती। यह मध्यम विवाह है।

3.आर्श विवाह : कन्या-पक्ष वालों को कन्या का मूल्य देकर (सामान्यतः गौदान करके) कन्या से विवाह कर लेना 'अर्श विवाह' कहलाता है। यह मध्यम विवाह है।
 
4.प्रजापत्य विवाह:- कन्या की सहमति के बिना माता-पिता द्वारा उसका विवाह अभिजात्य वर्ग (धनवान और प्रतिष्ठित) के वर से कर देना 'प्रजापत्य विवाह' कहलाता है।

5.गंधर्व विवाह:- इस विवाह का वर्तमान स्वरूप है प्रेम विवाह। परिवार वालों की सहमति के बिना वर और कन्या का बिना किसी रीति-रिवाज के आपस में विवाह कर लेना 'गंधर्व विवाह' कहलाता है। वर्तमान में यह मात्र यौन आकर्षण और धन तृप्ति हेतु किया जाता है, लेकिन इसका नाम प्रेम विवाह दे दिया जाता है। इसका नया स्वरूप लिव इन रिलेशनशिप भी माना जाता है।
 
6. असुर विवाह:- कन्या को खरीद कर (आर्थिक रूप से) विवाह कर लेना 'असुर विवाह' कहलाता है।

7.राक्षस विवाह:- कन्या की सहमति के बिना उसका अपहरण करके जबरदस्ती विवाह कर लेना 'राक्षस विवाह' कहलाता है।

8.पैशाच विवाह:- कन्या की मदहोशी (गहन निद्रा, मानसिक दुर्बलता आदि) का लाभ उठा कर उससे शारीरिक संबंध बना लेना और उससे विवाह करना 'पैशाच विवाह' कहलाता है।
 
ब्रह्म विवाह : हिन्दू धर्मानुसार विवाह एक ऐसा कर्म या संस्कार है जिसे बहुत ही सोच-समझ और समझदारी से किए जाने की आवश्यकता है। दूर-दूर तक रिश्तों की छानबिन किए जाने की जरूरत है। जब दोनों ही पक्ष सभी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं तभी इस विवाह को किए जाने के लिए शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। इसके बाद वैदिक पंडितों के माध्यम से विशेष व्यवस्था, देवी पूजा, वर वरण तिलक, हरिद्रालेप, द्वार पूजा, मंगलाष्टकं, हस्तपीतकरण, मर्यादाकरण, पाणिग्रहण, ग्रंथिबन्धन, प्रतिज्ञाएं, प्रायश्चित, शिलारोहण, सप्तपदी, शपथ आश्‍वासन आदि रीतियों को पूर्ण किया जाता है।
 
दोनों पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या का विवाह निश्चित कर देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। सामान्यतः इस विवाह में वैदिक रीति और नियम का पालन किया जाता है। इस विवाह में कुंली मिलान को उचित रीति से देख लिया जाता है। मांगलिक दोष मात्र 20 प्रतिशत ही बाधक बन सकता है। वह भी तब जब अष्टमेश एवं द्वादशेश दोनों के अष्टम एवं द्वादश भाव में 5 या इससे अधिक अंक पाते हैं। मांगलिक के अलावा यदि अन्य मामलों में कुंडली मिलती है तो विवाह सुनिश्चित कर दिया जाता है। अत: मंगल दोष कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं होती है।
 
वर द्वारा मर्यादा स्वीकारोक्ति के बाद कन्या अपना हाथ वर के हाथ में सौंपे और वर अपना हाथ कन्या के हाथ में सौंप दे। इस प्रकार दोनों एक दूसरे का पाणिग्रहण करते हैं। यह क्रिया हाथ से हाथ मिलाने जैसी होती है। मानों एक दूसरे को पकड़कर सहारा दे रहे हों। कन्यादान की तरह यह वर-दान की क्रिया तो नहीं होती, फिर भी उस अवसर पर वर की भावना भी ठीक वैसी होनी चाहिए, जैसी कि कन्या को अपना हाथ सौंपते समय होती है। वर भी यह अनुभव करें कि उसने अपने व्यक्तित्व का अपनी इच्छा, आकांक्षा एवं गतिविधियों के संचालन का केन्द्र इस वधू को बना दिया और अपना हाथ भी सौंप दिया। दोनों एक दूसरे को आगे बढ़ाने के लिए एक दूसरे का हाथ जब भावनापूर्वक समाज के सम्मुख पकड़ लें, तो समझना चाहिए कि विवाह का प्रयोजन पूरा हो गया।
 
मनुष्य के ऊपर देवऋण, ऋषिऋण एवं पितृऋण- ये तीन ऋण होते हैं। यज्ञ-यागादि से देवऋण, स्वाध्याय से ऋषिगण तथा उचित रीति से ब्रह्म विवाह करके पितरों के श्राद्ध-तर्पण के योग्य धार्मिक एवं सदाचारी पुत्र उत्पन्न करके पितृऋण का परिशोधन होता है। इस प्रकार पितरों की सेवा तथा सदधर्म का पालन करने की परंपरा सुरक्षित रखने के लिए संतान उत्पन्न करना विवाह का परम उद्देश्य है। यही कारण है कि में ब्रह्म विवाह को एक पवित्र-संस्कार के रूप में मान्यता दी गयी है।
 
::/fulltext::
R.O. No. 13759/9 Advertisement Carousel
R.O. No. 13759/9 Advertisement Carousel

 Divya Chhattisgarh

 

City Office :-  Infront of Raj Talkies, Block - B1, 2nd Floor,

                              Bombey Market, GE Road, Raipur 492001

Address     :-  Block - 03/40 Shankar Nagar, Sarhad colony, Raipur { C.G.} 492007

Contact      :- +91 90099-91052, +91 79873-54738

Email          :- Divyachhattisgarh@gmail.com

Visit Counter

Total1074170

Visitor Info

  • IP: 216.73.216.121
  • Browser: Unknown
  • Browser Version:
  • Operating System: Unknown

Who Is Online

9
Online

2026-04-13