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नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों के चुनाव में आज वोटों की गिनती के दौरान और उसके बाद जमकर हंगामा हुआ. सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी के पार्षद टेबल पर चढ़ गए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की. बाद में नौबत हाथापाई की भी आ गई. एक महिला के बाल भी खींचे गए.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
दिल्ली नगर निगम की महापौर शैली ओबेरॉय ने मतगणना के दौरान एक वोट को अमान्य घोषित कर दिया. इसके बाद बीजेपी के पार्षद उग्र हो गए और वोटों की गिनती में बाधा डाली. नाराज बीजेपी पार्षदों पार्षदों ने उनसे चिल्लाकर कहा, "तुम्हें होश नहीं है."
बीजेपी के पार्षदों ने कहा कि वे पुनर्मतगणना की इजाजत नहीं देंगे. मेयर शैली ओबेरॉय ने कहा- रिकाउंटिंग के लिए एक पक्ष तैयार है जबकि दूसरा पक्ष तैयार नहीं है, इसलिए अब मैं रिकाउंटिंग नहीं कर रही. रिजल्ट एक अवैध वोट के बिना घोषित किया जाएगा.
नाराज बीजेपी पार्षदों ने "जय श्री राम" के नारे लगाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की. आम आदमी पार्टी के उनके प्रतिद्वंद्वियों ने जवाबी हमला करते हुए, "आम आदमी पार्टी जिंदाबाद, अरविंद केजरीवाल जिंदाबाद" के नारे लगाए.
स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव की मतगणना कई घंटे रुकी रही और माहौल गर्म होता गया. कुछ समय बाद सदन में अराजकता फैल गई. दोनों पक्षों के पार्षदों ने चिल्लाते हुए एक दूसरे को घूंसे, लात, थप्पड़ मारे और धक्का दिया. कुछ पार्षदों के कुर्ते फटे हुए नजर आए. एक पार्षद गिर भी गया.
आम आदमी पार्टी की सत्ता वाले दिल्ली नगर निगम के 250 पार्षदों में से कम से कम 242 ने एमसीडी की स्थायी समिति के छह सदस्यों के चयन के लिए मतदान किया. स्थायी समिति नगर निगम की एक शक्ति संपन्न बॉडी होती है जो यह तय करती है कि राशि का उपयोग कैसे किया जाए और किन परियोजनाओं पर किया जाए.
नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD)में बुधवार को मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के बाद स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के चुनाव को लेकर जमकर हंगामा देखने को मिला. इस दौरान पार्षदों के बीच मारपीट और धक्का-मुक्की की घटना हुई.जानकारी के अनुसार सदन में पार्षदों के द्वारा बोतलें भी फेंकी गईं.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव के करीब ढाई महीने बाद मेयर चुनाव में AAP की शैली ओबेरॉय ने बीजेपी की रेखा गुप्ता को हरा दिया. बीजेपी प्रत्याशी कमाल बागड़ी को हराकर आप के आले मोहम्मद इकबाल डिप्टी मेयर बने. इसके बाद स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में जमकर हंगामा हुआ.
स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव को लेकर मचे हंगामे के बीच आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि जब तक स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव नहीं हो जाता, हम MCD सदन में बैठे रहेंगे. मेयर और MCD के अधिकारी एक बार फिर से उठकर चले गए हैं.
आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा, 'जब तक चुनाव नहीं हो जाता, हमारा एक-एक पार्षद सदन में रहेगा. हम लोगों ने इनकी बहुत ज्यादती देखी है. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन जब तक नहीं होता. तीनों चुनाव नहीं होने तक डटे रहेंगे. हम डरने वाले नहीं हैं. 3 दिन, 4 दिन हफ्ता, 10 दिन... जितना रुकना होगा, रुकेंगे.'
संजय सिंह ने कहा- 'भाजपाइयों ने 15 सालों ने जो दिल्ली को कूड़ाघर बना रखा था. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली की दो करोड़ लोगों ने झाड़ू फेर दिया. लेकिन ये लोग जनादेश को नहीं मानते.'
उन्होंने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट गए. कोर्ट ने कहा कि तीनों चुनाव अलग-अलग होंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेयर चुनाव करवा रही हैं, लेकिन ये हमलावर हो रहे हैं. ऐसा कभी किसी ने नहीं देखा. ये गुंडा पार्टी है. एक महिला कैसे मेयर बन गई... ये उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. ये दृश्य जब लोगों के सामने जाएगा तो भाजपा वाले मुंह नहीं दिखा पाएंगे.'
आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा कि मेयर पर हमले की घटना की शिकायत हम पुलिस में करेंगे.दिल्ली नगर निगम में लगातार हंगामे के बीच बीजेपी पार्षद स्टेज पर चढ़ गए और मेयर को घेर लिया.
दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा है कि बीजेपी ने AAP पार्षदों द्वारा फोन ले जाकर वोट डालने का विरोध किया. आम आदमी पार्टी के पार्षद फोन से किसे अपना वोट दिखाना चाहते थे? ऐसे 50 मतों को निरस्त किया जाए और फिर से मतदान करवाई जाए.
स्टैंडिंग कमेटी सदस्यों के चुनाव के लिए जब वोटिंग हो रही थी तो बीजेपी ने इस बात पर आपत्ति जताई कि पार्षदों को वोटिंग के दौरान मोबाइल फोन क्यों ले जाने दिया जा रहा?
वोटिंग के दौरान शोर-शराबा होने पर मेयर ने कहा कृपया सब शांति से बैठिए वरना बाहर कर दिया जाएगा. बीजेपी लगातार नारेबाजी करती रही. बीजेपी पार्षदों ने नारेबाजी की 'गुंडागर्दी बंद करो.' इसके बाद बीजेपी पार्षद वेल में आ गए.
बीजेपी के लगातार हंगामे के बाद मेयर ने उनकी यह मांग मान ली है कि वोटिंग के दौरान मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत नहीं होगी. इसके बाद हंगामा बंद हुआ और बीजेपी पार्षद अपनी सीटों पर जाकर बैठ गए. हालांकि, इसके बाद भी हंगामा हुआ और सदन को आठ बार स्थगित करना पड़ा. हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही एक बार फिर रुक गई है.
मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न 'धनुष और तीर' को "खरीदने" के लिए "2000 करोड़ रुपये का सौदा" हुआ है. हालांकि, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे से विधायक सदा सर्वंकर ने दावे को खारिज कर दिया और पूछा, "क्या संजय राउत कैशियर हैं?" राउत ने एक ट्वीट में दावा किया कि 2,000 करोड़ रुपये एक प्रारंभिक आंकड़ा है और यह 100 प्रतिशत सच है. उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि सत्तारूढ़ दल के करीबी एक बिल्डर ने उनके साथ यह जानकारी साझा की है. राज्यसभा सदस्य ने कहा कि उनके दावे के समर्थन में सबूत हैं, जिसका खुलासा वह जल्द करेंगे.
“अभी बहुत खुलासे होंगे"
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी और उसे 'धनुष और तीर' चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश दिया. अपने 78 पन्नों के आदेश में चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट को राज्य में विधानसभा उपचुनावों के पूरा होने तक आवंटित "धधकती मशाल" चुनाव चिह्न रखने की अनुमति दी. संजय राउत ने रविवार को कहा कि शिवसेना के नाम को 'खरीदने' के लिए 2,000 करोड़ रुपये छोटी रकम नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया, ''चुनाव आयोग का फैसला सौदा है.'' राउत ने ट्वीट किया, ''मेरे पास विश्वसनीय जानकारी है कि शिवसेना के नाम और उसके चुनाव चिह्न को हासिल करने के लिए 2000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ है. यह प्रारंभिक आंकड़ा है और 100 फीसदी सच है. अभी बहुत खुलासे होंगे. देश का इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ होगा. ”
“वर्तमान मुख्यमंत्री क्या चाट रहे हैं?"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर “विपरीत विचारधारा वाले लोगों के तलवे चाटने” वाले हमले पर राउत ने कहा, “वर्तमान मुख्यमंत्री क्या चाट रहे हैं? महाराष्ट्र शाह की बातों को महत्व नहीं देता है. वर्तमान मुख्यमंत्री को छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है." शाह ने शनिवार को कहा कि जो लोग विपरीत विचारधारा वाले लोगों के तलवे चाट रहे थे, आज चुनाव आयोग के फैसले ने बता दिया कि सच्चाई किस तरफ है. शाह ने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना यह भी दोहराया कि 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद साझा करने पर कोई सहमति नहीं थी. 2019 के विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया, यह दावा करते हुए कि भाजपा ने उसके साथ सीएम का पद साझा करने का वादा किया था. उद्धव ठाकरे ने बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) का नेतृत्व किया, जब तक कि शिंदे के विद्रोह के बाद सरकार पिछले साल जून में गिर नहीं गई.
पुणे : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने शुक्रवार को कहा कि ‘तीर-कमान' का चिह्न खोने से उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि जनता उसके नए चिह्न को स्वीकार कर लेगी. पवार की पार्टी ठाकरे वाली शिवसेना की सहयोगी है.
शरद पवार ने याद दिलाया कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 1978 में एक नया चिह्न चुना था, लेकिन उससे पार्टी को नुकसान नहीं उठाना पड़ा था.
पवार ने एकनाथ शिंदे वाले गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देने और उसे मूल चिह्न ‘तीर-कमान' आवंटित करने के निर्वाचन आयोग (ईसी) के निर्णय पर यह प्रतिक्रिया दी.
इस बीच राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देने संबंधी निर्वाचन आयोग के फैसले को ‘‘अप्रत्याशित'' करार दिया और पूछा कि निर्वाचन आयोग ने फैसला सुनाने में जल्दबाजी क्यों की. उन्होंने कहा कि शिवसेना के आम कार्यकर्ता उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहेंगे.