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वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह 27 और 28 फरवरी को वियनतनाम की राजधानी हनोई में उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन के साथ दूसरी शिखर बैठक करेंगे। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, मेरे प्रतिनिधियों ने श्री किम जोंग उन के साथ दूसरे शिखर सम्मेलन को लेकर बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक की और समय तथा तारीख पर सहमति बनने के बाद हाल ही में वहां से लौटे हैं।
यह शिखर सम्मेलन 27 और 28 फरवरी को वियतनाम की राजधानी हनोई में होगा। मैं किम से मिलने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बाद में एक अन्य ट्वीट में लिखा, उत्तर कोरिया उन के नेतृत्व में एक महान आर्थिक शक्ति बनेगा।
उधर, ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस ने ट्विटर पर लिखा, वह (किम) कुछ आश्चर्यचकित कर सकते हैं, लेकिन वह मुझे आश्चर्यचकित नहीं करेंगे, क्योंकि मैं उन्हें जानता और अच्छी तरह से समझता हूं कि वह (किम) कितने सक्षम हैं? उत्तर कोरिया एक अलग तरह का रॉकेट-अर्थव्यवस्था बनेगा!
उल्लेखनीय है कि ट्रंप तथा किम के बीच पहली शिखर बैठक गत वर्ष जून में सिंगापुर में हुई थी। उसके बाद से ही दूसरी बैठक को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे, जो ट्रंप की घोषणा के बाद बिलकुल साफ हो गया है।
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ फरवरी अंत में वियतनाम में दूसरी शिखर वार्ता करेंगे। यह शिखर वार्ता 27-28 फरवरी को होगी। किम और ट्रंप ने पिछले साल सिंगापुर में मुलाकात की थी। दोनों देशों के नेताओं के बीच यह पहली शिखर वार्ता थी।
वार्षिक ‘स्टेट ऑफ यूनियन’ संबोधन में ट्रंप ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने के लिए उनके प्रशासन के प्रयासों में प्रगति हुई है। ट्रंप का यह दूसरा ‘स्टेट ऑफ यूनियन’ संबोधन है। राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि अभी काफी काम किया जाना है लेकिन उनके उत्तर कोरियाई नेता के साथ रिश्ते अच्छे हैं। ट्रंप ने हालांकि प्योंगयांग के साथ बढ़े तनाव के खतरों के बारे में भी आगाह किया।
ट्रंप ने कहा, अगर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं चुना गया होता, तो मेरे ख्याल से अभी हम उत्तर कोरिया के साथ एक बड़े युद्ध की स्थिति में होते। उत्तर कोरिया के साथ बातचीत में अहम अमेरिकी मध्यस्थ स्टीफन बीगन और प्योंगयांग के उनके समकक्ष के बीच बुधवार को मुलाकात होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि किम होक-चोल के साथ उनकी वार्ता से कुछ ठोस निकलकर आ पाएगा।
लाहौर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को मंगलवार देर रात लाहौर हवाई अड्डे पर सुरक्षा अधिकारियों ने देश से बाहर जाने से रोक दिया। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के अनुसार, गिलानी दक्षिण कोरिया जाने के लिए लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे थे, लेकिन उनका नाम उड़ान प्रतिबंध सूची (नो-फ्लाई लिस्ट) में है।
गिलानी बैंकॉक के रास्ते दक्षिण कोरिया जाने वाले थे। एफआईए ने कहा, हवाई अड्डे की आव्रजन खिड़की पर गिलानी को बताया गया कि उनका नाम काली सूची में रखा गया है, इसलिए वे देश से बाहर नहीं जा सकते। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे हमेशा अपने खिलाफ चल रहे विभिन्न मामलों में अदालत में पेश हुए हैं।
उन्होंने कहा, नो फ्लाई लिस्ट में मेरा नाम रखने का कोई मतलब नहीं था। मैं देश से भाग नहीं रहा था। प्रधानमंत्री इमरान खान का एकमात्र एजेंडा अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाना मालूम होता है। गिलानी ने कहा कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) सरकार को मुझे मेरा नाम काली सूची में रखने के बारे में सूचित करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि वह सरकार के अवैध फैसले को चुनौती देंगे। गौरतलब है कि गिलानी के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं। मामले की सुनवाई कर रही इस्लामाबाद की एक अदालत ने पिछले हफ्ते एक निजी विज्ञापन एजेंसी को कथित रूप से अवैध विज्ञापन अनुबंध देने से संबंधित एक मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट देने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
खास बातें
नई दिल्ली: नेपाल में काम करने वाले भारतीय कामगारों और मजदूरों के लिए अच्छी खबर नहीं है. अब नेपाल में भारतीय कामगारों को बिना परमिट के काम करने की इजाजत नहीं होगी. दरअसल, नेपाल सरकार ने वहां पर उद्योगों, कंपनियों और अन्य संस्थानों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए वर्क परमिट अनिवार्य कर दिया है. नेपाल के श्रम और व्यावसायिक सुरक्षा विभाग ने बुधवार को देशभर में अपने दफ्तरों को आदेश जारी करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग सेक्टर्स में काम करने वाले सभी भारतीय कामगारों के वास्तविक संख्या बताने के लिए कहा है.
विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है, 'कंपनियों में भारतीय वर्करों की जांच करके अपडेट कर दिया जाएगा और अगर उनके पास वर्क परमिट नहीं होगा तो संस्थान को बता दिया जाएगा कि वे इनका वर्क परमिट ले लें.' अभी तक भारत और नेपाल में विशेष संधि के तहत भारतीय नागरिकों को नेपाल में और नेपाली नागरिकों को भारत में काम करने के लिए किसी तरह के परमिट की जरूरत नहीं पड़ती थी. नेपाल सरकार के इस कदम को भारत के साथ उनके खुली सीमा को सुरक्षित करने के एक कदम की तरह देखा जा रहा है. बता दें, पिछले महीने नेपाल राष्ट्र बैंक ने भारतीय मुद्रा के 200, 500 और 2000 रुपए के नोटों के चलन पर बैन कर दिया था. हालांकि, भारतीय सरकार ने नेपाल के इस कदम पर को भी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी.