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Friday, 17 April 2026

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FIFA WC 2018 : अंतिम 16 में जगह बनाने को मैसी पर निर्भर होगी अर्जेंटीना...

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कजान (रूस)। अर्जेंटीना और लियोनल मैसी को विश्व कप में आगे बढ़ने के लिए शनिवार को फ्रांस के खिलाफ मैच में अपनी फॉर्म हासिल करनी होगी। फ्रांस की टीम भी विश्व कप में अब तक अपनी पूरी लय में नहीं दिखी है। विश्व कप का पहला प्री क्वार्टर फाइनल मैच रोमांचक होने की उम्मीद है। दोनों ही टीमों ने अब तक उम्मीदों के हिसाब से प्रदर्शन नहीं किया है और उनका विश्व कप में अब तक का सफर एक-दूसरे से अलग रहा है। जहां फ्रांस की टीम ने अपने तीन लीग मैचों में दो में जीत हासिल की और एक मुकाबला ड्रॉ किया, अर्जेंटीना ने केवल एक मैच जीता, एक में बुरी तरह हार गया और एक मुकाबला ड्रॉ खेला।

बड़े उम्र के खिलाड़ियों और टीम में असंतुलन अर्जेंटीना के लिए समस्याएं हैं और यह सब ग्रुप चरण में क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में साफ-साफ दिखा जब अर्जेंटीना को 0-3 की शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। लेकिन मैसी ने पिछले मुकाबले में नाइजीरिया के खिलाफ अपना खाता खोलते हुए टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई जो अर्जेंटीना के लिए एक शुभ संकेत हैं। दूसरी तरफ फ्रांस की टीम अब तक अपराजेय रहने के बाद सुस्त दिखी है। स्ट्राइकर एंटोइन ग्रिजमैन अब तक अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म हासिल करने में नाकाम रहे हैं और मिडफील्ड में टीम की रचनात्मकता अब तक नजर नहीं आई है। टीम के कोच डिडियर डेशचैम्प इस बात पर अटल हैं कि शनिवार को विश्व कप का नॉकआउट दौर शुरू होने के साथ फ्रांस अपनी पूरी लय में आ जाएगा। 

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FIFA WC 2018 : इतिहास की क्रूरता का शिकार हो गई जर्मनी....

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मॉस्को। चार बार की चैंपियन जर्मनी इतिहास की क्रूरता का ऐसा शिकार हुई कि उसे फीफा विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के पहले ही दौर में बाहर हो जाना पड़ा। फुटबॉल विश्वकप का 1930 से अब तक का इतिहास गवाह है कि अब तक सिर्फ दो ही देश इटली और ब्राजील चैंपियन बनने के बाद अगले विश्वकप में अपना खिताब बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं। 

इटली ने 1934 में खिताब जीता और इसे 1938 के विश्वकप में बरकरार रखा। ब्राजील 1958 में चैंपियन बना और फिर 1962 में उसने खिताब पर अपना कब्जा कायम रखा। चैंपियन जर्मनी को अपना खिताब बरकरार रखने के लिए इतिहास की बाधा को पार करना था, लेकिन उसके कदम पहले ही दौर में डगमगा गए और जर्मनी की टीम 1938 के बाद पहली बार पहले ही राउंड में बाहर हो गई। जर्मनी का टूर्नामेंट में बेहद खराब प्रदर्शन रहा और वह तीन मैचों में मात्र दो गोल कर पाई और अपने ग्रुप एफ में चौथे स्थान पर रही।

जर्मनी ने पहली बार 1954 में खिताब जीता लेकिन 1958 के विश्वकप में उसे चौथा स्थान मिला। जर्मनी ने 1974 में दूसरी बार विश्वकप जीता लेकिन 1978 के विश्वकप में जर्मन टीम राउंड-8 में बाहर हो गई। जर्मनी ने 1990 में खिताब हासिल किया लेकिन 1994 में उसे क्वार्टर फाइनल में बाहर हो जाना पड़ा। जर्मनी ने 2014 में खिताब जीता और इस बार पहले राउंड में बाहर हो गई।

विश्व कप के इतिहास में यह छठा मौका है जब चैंपियन टीम पहले दौर में बाहर हुई है। इनमें से चार मौके तो नई शताब्दी की शुरुआत होने पर आए हैं। केवल ब्राजील 2002 में खिताब जीतने के बाद अगले विश्व कप में ग्रुप चरण से आगे गई थी। फ्रांस, इटली, स्पेन और अब जर्मनी चार यूरोपीय ताकतें अपने खिताब के बचाव में पहले दौर की बाधा पार नहीं कर पाईं। विश्वकप में पहली बार चैंपियन बनने का गौरव उरूग्वे ने 1930 में हासिल किया था जो पहला विश्वकप था, लेकिन 1934 में टीम ने विश्वकप में हिस्सा नहीं लिया। इटली 1934 और 1938 में चैंपियन बनी लेकिन 1950 में वह अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकी और ग्रुप चरण में बाहर हो गई। वर्ष 1938 के बाद द्वितीय विश्वकप युद्ध के कारण 1942 और 1946 में विश्वकप का आयोजन नहीं हुआ था।

उरूग्वे ने 1950 में विश्व खिताब जीता लेकिन 1954 में उसे चौथा स्थान मिला। ब्राजील ने 1958 और 1962 में लगातार खिताब जीते लेकिन 1966 में उसे ग्रुप चरण में बाहर हो जाना पड़ा। इंग्लैंड ने एकमात्र बार 1966 में विश्वकप जीता लेकिन 1970 में उसे क्वार्टर फाइनल में बाहर हो जाना पड़ा। ब्राजील ने 1970 में खिताब जीता और 1974 में उसे चौथा स्थान मिला।

अर्जेंटीना 1978 में चैंपियन बनने के बाद 1982 में राउंड दो में बाहर हो गया। इटली ने 1982 में खिताब कब्जाया लेकिन 1986 में राउंड-16 में उसकी छुट्टी हो गई। अर्जेंटीना 1986 में चैंपियन बनने के बाद 1990 में उपविजेता रहा। ब्राजील 1994 में चैंपियन बना, लेकिन 1998 में उपविजेता रहा। फ्रांस 1998 में खिताब जीतने के बाद 2002 में ग्रुप चरण में बाहर हो गया।

 ब्राजील ने पांचवीं बार 2002 में खिताब जीता, लेकिन 2006 में वह ग्रुप चरण में बाहर हो गया। इटली 2006 में चैंपियन बनने के बाद 2010 में ग्रुप चरण में बाहर हुआ, जबकि स्पेन 2010 में पहली बार चैंपियन बनने के बाद 2014 में ग्रुप चरण में बाहर हुआ। 
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मयंक अग्रवाल ने इंग्लैंड में फिर खेली तूफानी पारी, तोड़ चुका है कोहली का रिकॉर्ड....

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नई दिल्ली। इन दिनों इंडिया ए क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर है जहां वो इंग्लैंड लायंस और वेस्टइंडीज ए टीम के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज़ खेल रही है। इंडिया ए टीम के इस दौरे पर एक भारतीय बल्लेबाज़ रनों का अंबार लगा रहा है। इंग्लैंड लायंस के बीच खेले जा रहे चौथे मैच में इंडिया ए टीम के ओपनर  मयंक अग्रवाल ने एक और शानदार शतक ठोक दिया। ये उनका इस दौरे पर तीसरा शतक रहा। 

इंग्लैंड लायंस के शेर मयंक के आगे ढेर

इंग्लैंड लायंस के खिलाफ खेले गए चौथे मैच में मयंक और शुभमन गिल ने मिलकर पहले विकेट के लिए 165 रन की साझेदारी की। पिछले मैच के शतकवीर मयंक ने इस मैच में भी सेंचुरी लगाई। इंडिया ए के इस ओपनिंग बल्लेबाज़ ने 104 गेंदों का सामना करते हुए 112 रन की पारी खेली। उन्होंने इस दौरान 10 चौके और चार छक्के लगाए। शुभमन गिल 80 गेंदों में 72 रन बनाकर आउट हुए। गिल ने अपनी पारी में 10 चौके और एक छक्का भी लगाया। 

इस त्रिकोणीय सीरीज़ के तीसरे मैच में वेस्टइंडीज़ ए के खिलाफ भी मयंक अग्रवाल ने शतक ठोका था। कैरिबियाई टीम के खिलाफ मयंक ने 102 गेंदों का सामना करते हुए 112 रन बनाए थे। इस पारी के दौरान उनके बल्ले से 11 चौके, 2 छक्के भी निकले थे। मयंक की पारी की बदौलत ही टीम इंडिया ने 222 रन के लक्ष्य को 38.1 ओवर में ही हासिल करते हुए वेस्टइंडीज़ ए को मात दे दी थी। इस मैच में मयंक ने शुभमन गिल के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 148 रनों की मैराथन साझेदारी कर भारत की जीत सुनिश्चित कर दी। शुभमन गिल ने भी इस मैच में अर्धशतक ठोका था।

लिसेस्टरसर के खिलाफ भी ठोकी थी सेंचुरी

लिसेस्टरसर के खिलाफ हुए मैच में भी मयंक अग्रवाल ने तूफानी पारी खेलते हुए शतक ठोका था। उनके बल्ले से 151 रन निकले थे और उन्होंने सिर्फ 90 गेंदों का सामना किया था। मयंक ने अपनी पारी में 18 चौके और 5 छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 142.45 का रहा था। 

ऐसा करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ है मयंक

मयंक अग्रवाल के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज़ है जो न तो सचिन तेंदुलकर बना सके और न ही मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली इस उपलब्धि तक पहुंच सके हैं। मयंक अग्रवाल भारत के घरेलू क्रिकेट में एक सीज़न में 2000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ हैं। मयंक ने इसी साल विजय हजारे ट्राफी के 8 मैचों में 3 शतक और चार अर्धशतक ठोके थे। विजय हजारे ट्रॉफी के 8 मैचों में उन्होंने 109, 84, 28,102, 89, 104, 81 और 90 रन बनाए थे। 

कोहली से भी आगे है मयंक

 मयंक अग्रवाल के लिए विजय हजारे टूर्नामेंट काफी अच्छा रहा था और उन्होंने इस बार एक रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। उन्होंने इस टूर्नामेंट में 723 रन बनाए थे। उनसे पहले इस टूर्नामेंट कोई भी बल्लेबाज़ इतने रन नहीं बना सका था। साल 2016-17 में दिनेश कार्तिक ने 607 तो वहीं साल 2008-09 में विराट कोहली ने इस टूर्नामेंट में 534 रन बनाने में कामयाबी हासिल की थी।

 

 

 

 
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FIFA WC 2018 : उरुग्वे ने रूस को 3-0 से हराया, ग्रुप ए में पहुंचा टॉप पर......

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समारा। मेजबान के टूर्नामेंट में जोरदार अभियान को दो बार के पूर्व चैंपियन उरुग्वे ने 3-0 की शानदार जीत के साथ थाम कर ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। विश्व कप में सबसे निचली रैंकिंग की टीम रूस और उरुग्वे पहले ही दो-दो मैच जीतकर नॉकऑउट दौर में पहुंच चुके थे और इस मुकाबले से ग्रुप के विजेता का फैसला होना था जिसमें उरुग्वे ने बाजी मार ली। 
रूस ने अपने पहले मैच में सऊदी अरब को 5-0 से और दूसरे मैच में मिस्र को 3-1 से पराजित किया था जबकि उरुग्वे ने मिस्र और सऊदी अरब के खिलाफ अपने दोनों मैच 1-0 के अंतर से जीते थे। कवानी ने आखिरी मिनट के गोल के साथ उरुग्वे के लिए तीन अलग-अलग विश्व कप में गोल करने की उपलब्धि हासिल कर ली। उरुग्वे ने पहले हाफ के दो गोल किए जो 1966 में फ्रांस के खिलाफ के बाद से उसके लिए पहला मौका है। उरुग्वे ने रूस के गोल पर 16 प्रयास किये जिनमें से छ: निशाने पर थे और उनमें से दो में गोल करने में कामयाबी मिली।

लगातार दो जीत के बाद सातवें आसमान पर पहुंच चुके रूस के लिए यह हार एक सबक हो सकती है क्योंकि अब उसे नॉकआउट में खेलना है जो करो या मरो का मुकाबला रहेगा। उरुग्वे की टीम अब 30 जून को ग्रुप बी की दूसरे नंबर की टीम से सोच्चि में भिड़ेगी जबकि रूस का 1 जुलाई को ग्रुप बी के विजेता से मास्को के लुझनिकी स्टेडियम में मुकाबला होगा।

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