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तेलअवीव: इजरायल के आतंक निरोधक ब्यूरो ने श्रीलंका की यात्रा को लेकर एक 'गंभीर बड़े खतरे' की चेतावनी जारी की है. इसमें यात्रियों को देश छोड़कर जाने और हाल में श्रीलंका की यात्रा को स्थगित करने को कहा गया है. सुरक्षा और विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत करने के बाद यह निर्णय लिया गया है. सीएनएन ने आतंक निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों के बयान का हवाला देकर यह बात कही है.
सुरक्षा को लेकर लेवल-2 दूसरे दर्जे का बड़ा खतरा है. लेवल-1 सबसे खतरनाक होता है, जिसमें यात्रियों से आग्रह किया जाता है कि वे तुरंत देश को छोड़ दें. यह चेतावनी श्रीलंका में ईस्टर के दिन रविवार को हुए आतंकी हमलों के बाद जारी की गई है. इन हमलों में 359 लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए. इस्लामिक स्ट्रेट ने हमले की जिम्मेदारी ली लेकिन श्रीलंका के अधिकारियों ने इसके लिए स्थानीय मुस्लिम समूहों को दोषी ठहराया.
::/fulltext::Sri Lanka Bomb Blast: श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 300 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत.
बता दें कि श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर गिरजाघरों और होटलों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 10 भारतीय नागरिकों की भी मौत हो हुई थी. कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया, 'रविवार को हुए धमाकों में दो और अन्य भारतीयों ए. मारेगौड़ा और एच. पुत्ताराजू की मृत्यु की पुष्टि करते हुए दुख हो रहा है. इससे इन हमलों में मारे गए भारतीय लोगों की संख्या अब बढ़कर दस हो गई है.'
इससे पहले बताया गया कि न्यूजीलैंड के शहर क्राइस्टचर्च में मुस्लिमों पर हुए हमले का बदला लेने के लिए श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में धमाके किए गए हैं. यह बात शुरुआती जांच में सामने आई थी. इस बात की जानकारी श्रीलंका के उप रक्षामंत्री ने दी थी. उन्होंने कहा था, जो भी श्रीलंका में हुआ उसके पीछे क्राइस्टचर्च में मुस्लिम पर हुआ हमला है'. श्रीलंका सरकार ने कहा है कि ईस्टर के मौके पर रविवार को देश में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की वजह से हुई विनाश की घटना कल्पना से परे थी और खुफिया जानकारी पहले मिल जाने के बावजूद देश में बड़ी संख्या में मौजूद गिरजाघरों को सुरक्षा प्रदान करना तकरीबन ‘असंभव' था. देश के रक्षा मंत्री हेमासिरी फर्नांडो ने मंगलवार को स्थानीय मीडिया से यह बात कही.
फर्नांडो ने कहा कि, ‘‘इन हमलों की जानकारी पहले मिल जाने के बाद भी गत रविवार को इतनी अधिक संख्या में मौजूद चर्चों को सुरक्षा प्रदान करना असंभव था.'' उन्होंने संडे टाइम्स से कहा कि सरकार ने कल्पना नहीं की थी कि इतने बड़े पैमाने पर हमले को अंजाम दिया जायेगा. फर्नांडो ने कहा कि देश की खुफिया एजेंसियों ने सरकार को पहले ही सूचित कर दिया था कि देश में एक छोटा लेकिन ताकतवर आपराधिक समूह सक्रिय है.
मृतकों में सर्वाधिक भारतीय
श्रीलंका में रविवार को ईस्टर के मौके पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में मारे गये 33 विदेशी नागरिकों में सबसे अधिक 10 लोग भारत से हैं. श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी. मंत्रालय ने बयान में कहा कि हमले में मारे गये विदेशी नागरिकों में भारत के 10, ब्रिटेन के सात, चीन, सउदी अरब और तुर्की के दो-दो तथा फ्रांस, जापान, बांग्लादेश, नीदरलैंड और स्पेन के एक-एक नागरिक शामिल हैं. इनके अलावा दो लोग अमेरिका और ब्रिटेन की दोहरी नागरिकता वाले तथा आस्ट्रेलिया और श्रीलंका की दोहरी नागरिकता वाले दो लोग भी शामिल हैं.
::/fulltext::कोलंबो: ईस्टर हमलों के बाद श्रीलंका ने बुर्के (Burqa) पर प्रतिबंध की योजना पर अमल की तैयारी शुरू कर दी है. जांच के संदिग्धों और अन्य सबूतों से हमले में बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने के संकेत मिले हैं. रविवार (21 अप्रैल) को हुए इन हमलों (Sri Lanka Bomb Blast) में 321 लोगों की मौत हो गई और करीब 500 लोग घायल हो गए.
डेली मिरर ने सूत्रों के हवाले से कहा कि सरकार मस्जिद अधिकारियों से विचार विमर्श करके इस कदम को लागू करने की योजना बना रही है. अखबार ने सूत्र के हवाले से कहा, ‘‘उन्होंने (सूत्र) कहा कि सरकार मस्जिद अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर इस कदम को लागू करने की योजना बना रही है और कई मंत्रियों ने इस मामले पर राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना से बात की.''
ऐसा पाया गया कि 1990 की शुरुआत में खाड़ी युद्ध तक श्रीलंका में मुस्लिम महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा में बुर्का और नकाब कभी शामिल नहीं रहे. खाड़ी युद्ध के समय चरमपंथी तत्वों ने मुस्लिम महिलाओं के लिए पर्दा शुरू किया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा सूत्रों ने बताया कि डेमाटागोडा में घटनाओं में शामिल रही कई महिलाएं भी बुर्का पहनकर भाग गई. अगर श्रीलंका ने बुर्का पर प्रतिबंध लगा दिया तो वह एशिया, अफ्रीका और यूरोप में उन देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिन्होंने आतंकवादियों को पुलिस से बचने या विस्फोटकों को छिपाने के लिए बुर्का का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए ऐसा किया. अखबार ने बताया कि चाड, कैमरून, गाबोन, मोरक्को, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है.
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