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Monday, 13 April 2026

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आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को शुरू होने वाला यह त्योहार माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पर्व है।....

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हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार गुप्त नवरात्रि 13 जुलाई को शुरू होने वाली है जो 21 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस दौरान सच्चे मन से आराधना करता है उसे देवी का आशीर्वाद ज़रूर प्राप्त होता है। आइए इस पवित्र पर्व के बारे में थोड़ा और विस्तार से जानते हैं। नौ दिनों तक चलने वाली यह पूजा देवी दुर्गा को समर्पित है। इन पवित्र दिनों में माँ दुर्गा की पूजा करके भक्त माता से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को शुरू होने वाला यह त्योहार माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पर्व है। प्रत्येक दिन माता के एक रूप की पूजा अर्चना की जाती है।

पहला दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित है, दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी, तीसरा माँ चंद्रघंटा, चौथा दिन माँ कूष्मांडा, पांचवा दिन माँ स्कंदमाता, छठा दिन माँ कात्यायनी, सातवें दिन माँ कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री को पूजा जाता है।

सप्तशती पाठ का शुभ समय

किसी भी देवी देवता की पूजा के लिए एक विशेष दिन होता है ठीक उसी प्रकार नवरात्रि का पवित्र अवसर सप्तशती पाठ या सप्तशती स्तोत्र के लिए सबसे शुभ माना गया है। कहते हैं इस स्तोत्र को पढ़ने या सुनने से मनुष्य के जीवन से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं साथ ही उसके जीवन में सुख और समृद्धि में भी वृद्धि होती है।

दुर्गा कवच जो इस पाठ का ही एक हिस्सा है मनुष्य को हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से दूर रखता है। इसके अलावा यह पाठ रोग, दोष, चोरी व्यापार में नुकसान आदि जैसी समस्याओं से भी दूर रखता है और व्यक्ति को सफलता की बुलंदियों तक ले जाता है।

काला जादू

कुछ लोग नवरात्री के दौरान दस महाविद्याओं की पूजा करते हैं ताकि वे महासिद्धि प्राप्त कर सकें। महासिद्धि वह अवस्था है जिसमें न सिर्फ भविष्य के बारे में पता लगाया जा सकता है बल्कि भविष्य को बदला भी जा सकता है। इतना ही नहीं नवरात्री में काला जादू भी किया जाता है। हालांकि हर धर्म में काला जादू को बहुत बड़ा पाप माना गया है।

नवरात्रि में व्रत

नवरात्री में न केवल माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है बल्कि लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत भी रखते हैं। इस दौरान भक्त अनाज ग्रहण नहीं करते वे फल या फिर तरल पदार्थ का ही सेवन करते हैं। यहां तक की वे बिस्तर पर न सोकर ज़मीन पर चटाई बिछाकर सोते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पूरे नौ दिनों तक कुर्सी या सोफे पर नहीं बैठते बल्कि ज़मीन पर बैठते हैं। माता की प्रतिमा या चित्र के आगे अखंड ज्योत जलाया जाता है।

आठवें और नौवें दिन को पारण का दिन कहा जाता है। जहां कुछ लोग अष्टमी को अपना व्रत खोलते हैं तो वहीं कुछ लोग नवमी को।

नवरात्रि पारण

पारण के दिन भक्त सुबह से ही अपनी तैयारियों में लग जाते हैं। सबसे पहले प्रसाद बनाया जाता है जैसे हलवा, पूरी और काले चने की सब्ज़ी। कहते हैं माता को यह सब बेहद प्रिय है। हालांकि कुछ लोग खीर भी बनाते हैं। माना जाता है कि यह प्रसाद घर पर ही बना होना चाहिए न की बाज़ार से मंगवाना चाहिए।

प्रसाद बनाने के बाद सबसे पहले माता और अन्य देवी देवताओं को इसका भोग लगाया जाता है। उसके बाद नौ कुंवारी कन्याओं को यह सब खिलाया जाता है। इन कन्याओं को माँ दुर्गा का नौ रूप कहा जाता है। प्रसाद देने से पहले इनके चरण धोये जाते हैं फिर तिलक लगाकर कलाई पर मोली बांधी जाती है। फिर इन्हें श्रृंगार का सारा सामान भेंट किया जाता है और अंत में प्रसाद दिया जाता है। इन कन्याओं को कंजक भी कहा जाता है और इस पूजा को कंजक पूजा के नाम से जाना जाता है। लोग इनके चरण स्पर्श करके इनका आशीर्वाद भी लेते हैं।

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पुष्य नक्षत्र में शुरू होगी 10 महाविद्याओं की साधना.....

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मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्रि इस बार आषाढ़ मास में 13 जुलाई 2018, शुक्रवार से शुरू हो रहे हैं। आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की एकम तिथि के साथ ही पुष्य नक्षत्र में नवरात्रि की शुरुआत होगी तथा सर्वार्थ सिद्धि योग में 21 जुलाई को गुप्त नवरात्रि की समाप्ति होगी।
 
पौराणिक मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान अन्य नवरात्रि की तरह ही पूजन करने का विधान है। इन दिनों भी 9 दिन के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा यानी पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए।
 
ये हैं गुप्त नवरात्रि की देवियां : - मां काली, तारादेवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्न माता, त्रिपुर भैरवी मां, धुमावती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
 
महत्व : - देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस तरह वर्ष में 4 बार नवरात्रि आती है और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के 9 रूपों की पूजा होती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेष कर तांत्रिक कियाएं, शक्ति साधनाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।
 
इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या के लिए मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का पूजन करते हैं। 

अष्टमी या नवमी के दिन कन्या-पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का उद्यापन करने की मान्यता है। नवरात्रि उद्यापन में कुंआरी कन्याओं को भोजन कराकर यथाशक्ति दान, दक्षिणा, वस्त्र और आभूषण तथा श्रृंगार सामग्री भेंट करने से मां भगवती की अपार कृपा मिलती है।
 
ज्ञात हो कि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का पर्व 13 से 21 जुलाई 2018 तक मना जाएगा। वर्ष में आदि शक्ति मां भगवती की उपासना के लिए चार नवरात्रि आती है। इसमें 2 गुप्त एवं 2 उदय नवरात्रि होती हैं। चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि उदय नवरात्रि के नाम से भी जानी जाती है। आषाढ़ और माघ की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है।
 
गुप्त नवरात्रि में भी नौ दिनों तक क्रमानुसार देवी के स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाएगी। गुप्त नवरात्रि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में खास तौर पर मनाई जाती है।
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इस बार सावन का महीना 28 या 29 दिनों का नहीं रहेगा बल्कि पूरे 30 दिनों तक चलेगा।.... 

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भगवान शिव की आराधना का पावन मास सावन इस साल शुभ संयोग के साथ शुरू होगा, सावन माह इस बार 28 जुलाई से शुरू होगा। इस साल का सावन का महीना बहुत खास रहने वाला है क्योंकि 19 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार सावन का महीना 28 या 29 दिनों का नहीं रहेगा बल्कि पूरे 30 दिनों तक चलेगा। दरअसल इस बार का सावन 30 दिनों का होने के पीछे अधिकमास पड़ने के कारण हुआ है। हर तीन साल में एक बार अधिकमास पड़ता है। 

स बार सावन में चार सोमवार के व्रत होंगे, पहला सावन का सोमवार 30 जुलाई को होगा। ऐसी मान्यता है कि सावन में सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से घर में सुख - समृद्वि आती है। आइए जानते है कि इस बार कब कब सोमवार का व्रत पड़ेगा। Shravan month is also known as Sawan month in North Indian states. All Mondays or Somwar(s) which fall during Shravan month are considered highly auspicious for fasting and known as Shravan Somwar or Sawan Somwar Vrats.

 इस बार सावन में चार सोमवार के व्रत होंगे, पहला सावन का सोमवार 30 जुलाई को होगा। ऐसी मान्यता है कि सावन में सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने से घर में सुख - समृद्वि आती है। आइए जानते है कि इस बार कब कब सोमवार का व्रत पड़ेगा।

सावन का महीना और सोमवार की प्रमुख तिथियां

इस बार सावन का महीना 28 जुलाई से आरम्भ होने जा रहा है जो 26 अगस्त रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। इस बार सावन माह में चार सोमवार के व्रत पड़ेंगे, जिनकी तिथियां ये है-

  • सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को होगा।
  • सोमवार 6 अगस्त 2018 को सावन का दूसरा सोमवार पड़ेगा।
  • 11 अगस्त 2018: हरियाली अमावस्या
  • 13 अगस्त 2018 को श्रावण का तीसरा सोमवार हरियाली तीज और होगा।
  • सावन का आखिरी सोमवार 20 अगस्त के दिन पड़ेगा।
  • 15 अगस्‍त को नागपंचमी का पर्व होगा।

ऐसे करें पूजा

  • जल्दी उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान की सफाई करें।
  • शिवलिंग पर जल व दूध अर्पित करें।
  • भोलेनाथ के सामने आंख बंद शांति से बैठें और व्रत का संकल्प लें।
  • सुबह और शाम को भगवान शंकर व मां पार्वती की अर्चना जरूर करें।
  • भगवान शंकर के सामने तिल के तेल का दीया प्रज्वलित करें और फल व फूल अर्पित करें।
  • ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। 
  • शिवलिंग पर पंच अमृत, नारियल व बेल की पत्तियां चढ़ाएं।
  • सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करें और दूसरों को भी व्रत कथा सुनाएं।
  • पूजा का प्रसाद वितरण करें और शाम को पूजा कर व्रत खोलें।

कुंवारों के ल‍िए खास

वैसे तो सावन का सोमवार में हर किसी की मनोकामना पूरी हो जाती है लेकिन ज‍िन लोगों की शादी नहीं हुई है, सावन के सोमवार में पूजा करने से उनका जल्‍द विवाह हो जाता है जिनकी हो चुकी है, उन्हें सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देते हैं।

मंगल गौरी व्रत से होगा मंगल

सावन महीने की एक बात और खास है कि इस महीने में मंगलवार का व्रत भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती के लिए किया जाता है। सावन के महीने में किए जाने वाले मंगलवार व्रत को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है।
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