Wednesday, 12 August 2026
  1. JuD ने दी पीएम मोदी की हत्या की धमकी, कहा- भारत के होंगे टुकड़े-टुकड़े.....
  2. 10वें दिन भी तेल की दामों में गिरावट, पेट्रोल 21 और डीजल 16 पैसा हुआ सस्ता.....
  3. प्रणब मुखर्जी ने दी नसीहत, नहीं चलेगी हिंदू राष्ट्र की अवधारणा.....
  4. संघ के कार्यक्रम में प्रणव मुखर्जी , कहा- राष्ट्रवाद किसी धर्म या भाषा में नहीं बंटा.....
  5. नगरोटा हमला, गिलानी की सिफारिश पर आतंकवादी को वीजा....
  6. 7वें वेतन आयोग : डाक सेवकों को 1 जनवरी 2016 से एरियर प्रदान किया जाएगा....
  7. प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में, पटेल बोले, प्रणब दा से ऐसी उम्मीद नहीं थी....
  8. रेलवे के इन 4 बड़े फैसलों का आप पर क्या होगा असर.....
  9. गुजरात के पूर्व IPS का दावा, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को गिरफ्तार करना चाहती थी CBI.....
  10. फ्लैग मीटिंग के बाद भी नहीं माना पाकिस्तान, फिर दागे मोर्टार

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कांग्रेस मुक्त भारत नहीं, वंशवाद मुक्त कांग्रेस चाहता है RSS.....

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हालांकि कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के भाषण की तारीफ कर रहे हैं लेकिन यह भी सच है कि वे प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से खुश नहीं थे.

राजनेता शायद ही रिटायर होते हैं. अगर ऐसा प्रणब मुखर्जी के साथ होता है तो राजनीति को उनसे अलग करना और ज्याद मुश्किल हो जाता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति की मौजूदगी और भाषण में कई घुमाव हैं. पहला कि प्रणब मुखर्जी कांग्रेस को संदेश देना चाहते थे कि अब वह कांग्रेस नेता नहीं रहे, वह कांग्रेस से अलग एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं. हालांकि प्रणब मुखर्जी हमेशा ही स्वतंत्र रहे. शायद यहीं वजह रही होगी कि सोनिया गांधी ने उनके बजाये मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया, जो कि उनसे राजनीतिक विशेषज्ञता और अनुभव में जूनियर थे. हालांकि कांग्रेस नेता खुले तौर पर इस बारे में बोलने से बचते हैं, लेकिन इसका नतीजा सामने है.

यह इस तरह का क्षण है जब प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस नेताओं को बता दिया है कि वो कौन हैं. हालांकि कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के भाषण की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि वे प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से खुश नहीं थे, और वह भी उस वक्त जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की राजनीति का आधार ही आरएसएस का विरोध है. लेकिन अन्य राजनीतिक पार्टियां इस पर क्या सोचती हैं? हो सकता है कि कई विपक्षी प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से खुश न हो, लेकिन वो इसे बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहते. आखिरकार मुखर्जी पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर मंच पर गए थे. लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) जैसे विपक्षी दलों के लिए, जो मोदी के खिलाफ गैर-कांग्रेसी, गैर-बीजेपी मोर्चे की तलाश में हैं, मुखर्जी उस सर्वमान्य उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं जिनसे किसी को कोई समस्या नहीं है. अधिकतर विपक्षी पार्टियां न्यूज 18 से बातचीत में कह चुकी हैं कि किसी सर्वमान्य उम्मीदवार तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन इसके बावजूद मुखर्जी की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. हालांकि, समाजवादी पार्टी (एसपी) जैसी कुछ पार्टियां हैं जिन्होंने मुखर्जी को प्रधानमंत्री के रूप में स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है. मुलायम सिंह यादव ही थे जिन्होंने शुरुआत में राष्ट्रपति के लिए भी प्रणब मुखर्जी के नाम का विरोध किया था.

लेकिन मुलायम सिंह की गैर-मंजूरी अलग है, मुखर्जी कुछ फायदे के साथ आते हैं. उनके पास विशाल अनुभव है, ज्यादातर विपक्षी दलों और यहां तक ​​कि बीजेपी के साथ भी अच्छा तालमेल है. आरएसएस कार्यक्रम में जाने से उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया है कि उन्हें उस व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए जिसने एक बार फिर कांग्रेस पर कब्जा कर लिया था. प्रणब मुखर्जी एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर पहचान रखते हैं जो सदैव अपने हिसाब से फैसले लेते हैं. इसीलिए उनके और गांधी परिवार के बीच में हमेशा विश्वास का अभाव रहा है जो आगे भी रहेगा. प्रणब मुखर्जी के भाषण का कांग्रेस नेताओं ने बारीकी से विश्लेषण किया है. प्रणब का आरएसस के संस्थापक केबी हेडगेवार को ‘भारत माता का महान बेटा’ बताना और महात्मा गांधी की हत्या की बात अपने भाषण में शामिल न करना उनके ध्यान से ओझल नहीं हुआ. कांग्रेस के लिए इतना ये सोचने के लिए पर्याप्त है कि प्रणब दूसरे पाले में जा सकते हैं. लेकिन आरएसएस भी इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाता हुआ नजर आ रहा है. संघ को कांग्रेस विरोधी नहीं बल्कि गांधी विरोधी माना जाता है. राहुल गांधी महात्मा गांधी की हत्या के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हैं, आरएसएस अपनी विचारधारा के समर्थन के लिए कांग्रेस नेताओं (गांधी के अलावा) का इस्तेमाल करना चाहता है और प्रणब मुखर्जी इसका उत्तम उदाहरण हैं.
 
आरएसएस के लिए मुखर्जी कांग्रेस का सबसे उत्तम चेहरा हैं, उनकी यात्रा का इस्तेमाल बार-बार गांधी परिवार का अपमान के लिए किया जा सकता है. लेकिन यहां आरएसएस केवल गांधी परिवार को ही संदेश नहीं देना चाहता है. आरएसएस के भी कुछ लोग बीजेपी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ स्लोगन से खुश नहीं हैं, ऐसे में मुखर्जी का आरएसएस के कार्यक्रम में आना बीजेपी के लिए भी एक संदेश है. संदेश साफ है कि कांग्रेस से जुड़े हर नेता को खारिज नहीं किया जा सकता है. आरएसएस के अंदर जो मोदी-शाह के साथ सहज महसूस नहीं करते उन्हें प्रणब कार्ड से दिक्कत नहीं होगी. लेकिन इन सबके बावजूद अंतिम निर्णय के पास रहता है. इस राजनीतिक रस्सा-कस्सी में खींचे जाने के लिए वह उत्सुक तो नहीं होंगे, लेकिन उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनका राजनीतिक इस्तेमाल अभी खत्म नहीं हुआ है.

 

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FACEBOOK : फिर हुई 1.4 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारी सार्वजनिक.....

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फेसबुक को एक बार फिर अपने यूजर्स से माफी मांगनी पड़ी है। वजह दुनियाभर में फेसबुक के 1.4 करोड़ यूजर्स के प्राइवेट पोस्ट सार्वजनिक हो जाने का है। इससे पहले भी कैंब्रिज एनेलिटिका कांड के बाद फेसबुक विवादों में आया था। मीडिया में आ रही रिपोट्र्स के मुताबिक, इसके पीछे सॉफ्टवेयर बग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। इसके चलत यूजर्स को अपने प्राइवेट पोस्ट को भी पब्लिक करने का ऑप्शन आ रहा था। फेसबुक ने गुरुवार को खुद माना कि पिछले महीने उसके सॉफ्टवेयर में कुछ गड़बड़ी आ गई थी. इस गड़बड़ी की वजह से दुनियाभर के 14 मिलियन यूजर्स को फेसबुक पोस्ट पब्लिक करने का मैसेज गया। फेसबुक ने इस गड़बड़ी पर खेद भी जताया है।

फेसबुक के प्राइवेसी ऑफिसर ईरिन इग्न ने एक बयान में कहा कि कंपनी को अपने सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की सूचना मिली है. इस वजह से दुनिया भर के कई यूजर्स के निजी पोस्ट सार्वजनिक हो गए। ईरिन इग्न के अनुसार यह बग 18 मई से 27 मई के बीच सक्रिय था, जिसकी वजह से ये तमाम मैसेज सार्वजनिक रूप से लोगों के बीच साझा हो रहे थे। फेसबुक ने ट्विटर पर भी सफाई दी कि कोई भी प्राइवेट पोस्ट पब्लिक नहीं किया गया. सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी से यूजर तक पोस्ट को सार्वजनिक करने का सुझाव पहुंचने लगा था. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। फेसबुक ने कहा है कि इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद अपने सभी यूजर्स से अपने पोस्ट की एक बार फिर से जांच करने की अनुरोध भी किया है। एक्टिविटी लॉग में जाकर यूजर्स देखें कि क्या उनके एकाउंट से इस तरह की गड़बड़ी को दूर किया जा सका है या नहीं। ईरिन इग्न ने कहा कि हम यहां यह भी साफ कर देना चाहते हैं कि 18 मई से पहले शेयर किए गए फेसबुक पोस्ट में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है। 

कुछ महीने पहले ट्विटर ने भी अपने दुनियाभर के अपने 33 करोड़ यूजर्स से पासवर्ड बदलने को कहा था। आपको बता दें कि कैंब्रिज एनालिटिका विवाद के बाद मार्क जकरबर्ग को अमेरिकी कांग्रेस में जाकर सफाई भी देनी पड़ी थी। आपको बता दें कि फेसबुक के लगभग 87 मिलियन यूजर्स का डेटा कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा लीक कर दिया गया था। इसके बाद फेसबुक ने कई बदलाव किए और 9 अप्रैल से उन यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजना शुरू किया है जिनका डेटा इस स्कैंडल में लीक हुआ है।

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