Wednesday, 12 August 2026

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 केविन एंडरसन ने अमेरिका के को विम्बलडन के सेमीफाइनल में हराकर पहली बार पुरुष वर्ग के फाइनल में प्रवेश कर लिया।.... 

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लंदन। दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन ने अमेरिका के को विम्बलडन के इतिहास के सबसे लम्बे सेमीफाइनल में शुक्रवार को 7-6, 6-7, 6-7, 6-4, 26-24 से हराकर पहली बार पुरुष वर्ग के फाइनल में प्रवेश कर लिया। एंडरसन ने छह घंटे 36 मिनट तक चला यह मुकाबला जीता जो विम्बलडन के इतिहास में में सबसे लम्बा सेमीफाइनल बन गया। दोनों खिलाड़ी योद्धाओं की तरह एक-दूसरे को हराने के लिए जूझते रहे और आखिरी सेट तो दो घंटे 55 मिनट तक चला। पॉवर गेम और जबरदस्त सर्विस के इस मुकाबले में एंडरसन ने 49वें गेम में जाकर इस्नर की सर्विस तोड़ी और 50वें गेम में अपनी सर्विस बरकरार रख ऐतिहासिक मुकाबला जीत लिया।

एंडरसन इसके साथ ही 97 वर्षों में विम्बलडन के फाइनल में पहुंचने वाले दक्षिण अफ्रीका के पहले खिलाड़ी बन गए। एंडरसन का खिताब के लिए विश्व के नंबर एक खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल और पूर्व नंबर एक सर्बिया के नोवाक जोकोविच के बीच मैच के विजेता से मुकाबला होगा। नडाल और जोकोविच का दूसरा सेमीफाइनल कल अधूरा रह गया था, जिसे आज पूरा किया जाएगा। मैच रुकने के समय तीन बार के चैंपियन जोकोविच 6-4, 3-6, 7-6 से आगे थे। इस्नर ने 2010 में निकोलस माहुत के खिलाफ पहले दौर में 11 घंटे पांच मिनट और तीन तक चला मुकाबला खेला था। उस मुकाबले के आखिरी सेट का स्कोर 70-68 था जिसे इस्नर ने जीता था। अब उनका एंडरसन के साथ मुकाबला साढ़े छह घंटे तक खिंच गया लेकिन इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

एंडरसन ने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में गत चैंपियन रोजर फेडरर को चार घंटे 14 मिनट में हराया था। इस तरह एंडरसन दो दिन में दो मैच में 10 घंटे और 50 मिनट कोर्ट पर गुजार चुके हैं और अब फाइनल के लिए उन्हें खुद को जल्द से जल्द ताजा दम कर लेना होगा। मैराथन सेमीफाइनल का पहला सेट 63 मिनट, दूसरा सेट 54 मिनट, तीसरा सेट 61 मिनट, चौथा सेट 43 मिनट और पांचवां सेट 175 मिनट तक चला। छह फुट आठ इंच लम्बे एंडरसन और छह फुट 10 इंच लम्बे इस्नर के बीच मुकाबले में तीन सेट टाई ब्रेक तक खींचे और मैच में कुल 102 एस लगाए गए। एंडरसन ने 49 और इस्नर ने 53 एस मारे। एंडरसन ने 129 और इस्नर ने 118 विनर्स लगाए। एंडरसन ने 50वें गेम में अपनी सर्विस पर इस्नर की चुनौती का जैसे ही अंत किया दर्शकों ने भी राहत की सांस ली और तालियां बजाकर इन दो योद्धाओं का अभिवादन किया। एंडरसन से पहले दक्षिण अफ्रीका के ब्रायन नॉर्टन 1921 में में पहुंचे थे।

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भारतीय मुक्केबाजों का सर्बिया के सुबोटिका में चल रहे में शानदार प्रदर्शन जारी...... 

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नई दिल्ली। भारतीय मुक्केबाजों का सर्बिया के सुबोटिका में चल रहे गोल्डन ग्लव वोजवोदिना युवा में शानदार प्रदर्शन जारी रहा और देश के नौ मुक्केबाजों ने तीसरे दिन सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के किए। इन नौ में से छह महिलाएं जबकि तीन पुरुष मुक्केबाज हैं जबकि एक मुक्केबाज आस्था पाहवा (75 किग्रा) बीती रात क्वार्टर फाइनल चरण में बाहर हो गईं। 

नीतू (48 किग्रा), दिव्या पवार (54 किग्रा), ज्योति (51 किग्रा), अनामिका (51 किग्रा), साक्षी (57 किग्रा) और मनीषा (64 किग्रा) ने महिलाओं के ड्रॉ में पदक दौर में प्रवेश किया। पुरुषों की स्पर्धा में बी बरुण सिंह (49 किग्रा), भावेश कट्टीमणि (52 किग्रा) और विजयदीप (69 किग्रा) ने कम से कम कांस्य पदक पक्के किए।

महिला वर्ग की शुरुआत नीतू की बाउट से हुई जिन्होंने थाईलैंड की निलाडा मीकोन को पराजित किया। दिव्या ने भी हंगरी की बेटिना किस पर 5-0 और साक्षी ने क्रोएशिया की निकोलिना कासिच पर इसी अंतर से जीत दर्ज की। ज्योति को इटली की जार्जिया रास ने चुनौती दी, लेकिन अंत में उन्होंने 4-1 के स्कोर से जीत दर्ज की। अनामिका ने कजाखस्तान की झानसाया एबड्रेमोवा को शिकस्त दी।

मनीषा ने दबदबा बनाते हुए हंगरी की वेरोनिका विलास को 5-0 से हराया। फिर पुरुषों की स्पर्धा में बरुण को मैसेडोनिया के बोबान मिजालेव को हराने में पसीना बहाना पड़ा। एशियाई पदकधारी भावेश ने हंगरी के टामस बोरसोस को, जबकि विजयदीप ने बोस्निया हर्जेगोविना के ड्रेगोलजुब कुलिच को पराजित किया। छह अन्य भारतीय मुक्केबाजों ने कल सेमीफाइनल में जगह बनाई थी, जिससे कुल 15 मुक्केबाज अंतिम चार में पहुंच गए हैं।

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हिमा दास : ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय ऐथलीट हैं।......

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नई दिल्ली । एथलीट हिमा दास ने गुरुवार को इतिहास रच दिया। उन्होंने IAAF वर्ल्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप के 400 मीटर फाइनल में गोल्ड मेडल जीता। वह ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय ऐथलीट हैं। हिमा ने आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है. यह पहली बार है कि भारत को आईएएएफ की ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल हुआ है. उनसे पहले भारत की कोई महिला खिलाड़ी जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड नहीं जीत सकी थी.bहिमा ने यह दौड़ 51.46 सेकेंड में पूरी की. रोमानिया की एंड्रिया मिकलोस को सिल्वर और अमरीका की टेलर मैंसन को ब्रॉन्ज़ मेडल मिला.

हिमा दास ने इस उपलब्धि के साथ उस सूखे को भी खत्म कर दिया जो भारत के लेजेंड मिल्खा सिंह और पीटी उषा भी नहीं कर पाए थेहिमा दास से पहले भारत की कोई महिला या पुरुष खिलाड़ी जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैम्पियनशिप में गोल्ड या कोई मेडल नहीं जीत सका था. .हिमा दास से पहले सबसे अच्छा प्रदर्शन मिल्खा सिंह और पीटी उषा का रहा था. पीटी उषा ने जहां 1984 ओलिंपिक में 400 मीटर हर्डल रेस में चौथा स्थान हासिल किया था.मिल्खा सिंह 1960 रोम ओलिंपिक में 400 मीटर रेस में चौथे स्थान पर रहे थे. इन दोनों के अलावा कोई भी ख‍िलाड़ी ट्रैक इवेंट में मेडल के करीब नहीं पहुंच सका है.हिमा ने राटिना स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 51.46 सेकेंड का समय निकालते हुए जीत हासिल की.

इसी के साथ वह इस चैंपियनशिप में सभी आयु वर्गो में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला बन गई हैं. असम की रहने वालीं दास ने भारतीयी अंडर-20 के रेकॉर्ड 51.32 सेकंड का समय निकालते हुए अप्रैल में गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में छठे स्थान पर रही थीं। इसके बाद से वह लगातार अपना समय सुधारती रही हैं। हाल ही में उन्होंने अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया था। इस इवेंट में उन्होंने 51.13 सेकंड का समय निकाला था

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 FIFA WC 2018 : ‘चमत्कारिक’ जीत के बाद जश्न में डूबा क्रोएशिया.....

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जगरेब। पहली बार विश्व कप में पहुंचने के बाद क्रोएशिया में मानों जज्बात का सैलाब उमड़ पड़ा। कहीं आंसू छलके तो कहीं ठहाके बिखरे। कहीं पटाखे छूटे तो कहीं नारों के शोर से आसमान गूंज उठा। सरकारी टीवी के कमेंटेटर ड्रागो कोसिच खुशी से चीखते हुए बोले, क्रोएशिया विश्व कप फाइनल में। शानदार। सबसे बड़ा चमत्कार रूस में। जगरेब के मुख्य चौक पर भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में फुटबॉलप्रेमी उमड़ पड़े। क्रोएशिया के स्टार खिलाड़ी लूका मोडरिच ने कहा, हम गौरवान्वित और खुश हैं। हम यहां नहीं रूकेंगे। विजयी गोल करने वाले मनजुकिच ने कहा, ‘महान टीमें ही इंग्लैंड के खिलाफ एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी कर सकती हैं। हम शेरों की तरह खेलें।’
 
सड़कों पर क्रोएशिया के ध्वज के लाल, सफेद और नीले रंग लपेटे लोगों का समूह खुशी में नाचता और गाता नजर आया। अपने दोस्तों के साथ जश्न में सराबोर फ्रान कूलिच ने कहा कि यह जज्बात से भरी शाम है। हमारे लिए यह बहुत बड़ी जीत है। कैफे और होटलों में वेटरों, कर्मचारियों, टीवी कमेंटेटरों और अस्पतालों में नर्सों ने भी लाल और सफेद जर्सी पहन रखी थी। कुछ दुकानें जल्दी बंद हो गई ताकि स्टॉफ मैच देख सके।
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